संक्षेप रामायण – श्लोक 100

संस्कृत श्लोक

इति श्रीमद्वाल्मीकीये रामायणे बालकाण्डे संक्षेपरामायणं नाम प्रथमः सर्गः ॥

हिंदी अनुवाद

इस प्रकार श्रीमद् वाल्मीकीय रामायण के बालकाण्ड में संक्षेप रामायण नामक प्रथम सर्ग समाप्त हुआ।

अर्थ / व्याख्या

बालकाण्ड के प्रथम सर्ग का समापन।

टिप्पणी

यह श्लोक बालकाण्ड के प्रथम सर्ग का समापन करता है।

॥ श्लोक १०० – प्रथम सर्ग की समाप्ति ॥

इति श्रीमद्वाल्मीकीये रामायणे बालकाण्डे संक्षेपरामायणं नाम प्रथमः सर्गः ॥
iti śrīmad vālmīkīye rāmāyaṇe bālakāṇḍe saṃkṣeparāmāyaṇaṃ nāma prathamaḥ sargaḥ ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : इस प्रकार श्रीमद् वाल्मीकीय रामायण के बालकाण्ड में संक्षेप रामायण नामक प्रथम सर्ग समाप्त हुआ।

🔹 English Translation : Thus ends the first chapter named Sankshepa Ramayana in the Balakanda of the Valmiki Ramayana.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
इतिअव्ययइस प्रकार
श्रीमद्वाल्मीकीयेविशेषण, नपुंसकलिंग, सप्तमी एकवचनश्रीमद् वाल्मीकीय
रामायणेनपुंसकलिंग, सप्तमी एकवचनरामायण में
बालकाण्डेपुल्लिंग, सप्तमी एकवचनबालकाण्ड में
संक्षेपरामायणम्नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचनसंक्षेप रामायण
नामअव्ययनामक
प्रथमःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनप्रथम
सर्गःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनसर्ग

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

यह श्लोक बालकाण्ड के प्रथम सर्ग का समापन करता है। इस सर्ग में नारद जी ने वाल्मीकि जी को राम के सम्पूर्ण जीवन चरित्र का संक्षेप में वर्णन किया था। यह सर्ग सम्पूर्ण रामायण का सार है। इसके १०० श्लोकों में राम के जन्म से लेकर स्वर्गारोहण तक की सम्पूर्ण कथा समाहित है।

इस सर्ग के अन्त में फलश्रुति दी गई है, जिसमें इसके पाठ-श्रवण के अनेक लाभ बताए गए हैं – पापनाश, सर्वकामनापूर्ति, रामभक्ति, रामलोक की प्राप्ति आदि।

अब आगे के सर्गों में वाल्मीकि और नारद का संवाद, वाल्मीकि को ब्रह्मा का वरदान, और रामायण की रचना का विस्तार आएगा। यह सर्ग रामायण का मूल है, जिस पर सम्पूर्ण महाकाव्य आधारित है।

॥ इति बालकाण्डे प्रथमः सर्गः ॥

ॐ तत्सदिति श्रीमद्रामायणे बालकाण्डे प्रथमः सर्गः ॥

॥ श्रीराम जय राम जय जय राम ॥

जय श्री राम 🙏