अयोध्या का वर्णन – श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
मत्तद्विरदसम्बाधां सङ्कीर्णां हरिभिस्तथा। सदा सम्पूर्णमर्यादां मर्यादाभिरिवावृताम्॥
हिंदी अनुवाद
वह नगरी मदमस्त हाथियों से युक्त तथा बंदरों से भी भरी हुई थी। वह सदा सम्पूर्ण मर्यादाओं से युक्त थी, मानो मर्यादाओं ने ही उसे घेर रखा हो।
अर्थ / व्याख्या
यह श्लोक अयोध्या की प्राकृतिक समृद्धि (हाथी, बन्दर) और नैतिक मर्यादाओं का वर्णन करता है। हाथी और बन्दर वन्य जीवों की बहुलता दर्शाते हैं, जो समृद्ध पर्यावरण का सूचक है। मर्यादाओं से घिरी होना बताता है कि नगर में धर्म और आचार-विचार का सर्वोच्च स्थान था।
टिप्पणी
मर्यादा का अर्थ है सीमा, नियम, आचार संहिता। यहाँ अयोध्या को उन मर्यादाओं से घिरा बताया गया है, जो धर्म की रक्षा करती हैं। हरि शब्द का अर्थ बन्दर या सिंह भी हो सकता है, पर यहाँ प्रसंगवश बन्दर अर्थ उचित है।
॥ श्रीरामायण बालकाण्ड सर्ग ५ श्लोक २० ॥
सदा सम्पूर्णमर्यादां मर्यादाभिरिवावृताम् ॥
sadā sampūrṇamaryādāṃ maryādābhirivāvṛtām ||
🔹 हिन्दी अनुवाद : वह नगरी मदमस्त हाथियों से युक्त तथा बंदरों से भी भरी हुई थी। वह सदा सम्पूर्ण मर्यादाओं से युक्त थी, मानो मर्यादाओं ने ही उसे घेर रखा हो।
🔹 English Translation : The city was crowded with mighty elephants in rut and also filled with monkeys. It was always complete with all codes of conduct (maryādās), as if it were surrounded by those very boundaries of righteousness.
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| मत्तद्विरदसम्बाधाम् | विशेषण, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन | मदोन्मत्त हाथियों से व्याप्त |
| सङ्कीर्णाम् | विशेषण, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन | भरी हुई, मिश्रित |
| हरिभिः | पुल्लिंग, तृतीया बहुवचन | बन्दरों से (या सिंहों से) |
| तथा | अव्यय | इसी प्रकार |
| सदा | अव्यय | हमेशा |
| सम्पूर्णमर्यादाम् | विशेषण, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन | सम्पूर्ण मर्यादाओं से युक्त |
| मर्यादाभिः इव | स्त्रीलिंग, तृतीया बहुवचन + अव्यय | मर्यादाओं के द्वारा |
| आवृताम् | विशेषण, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन | आवृत, घिरी हुई |
📜 श्लोक का ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व
यह अयोध्या-वर्णन का अंतिम श्लोक है, जो नगर की प्राकृतिक समृद्धि और नैतिक श्रेष्ठता दोनों को एक साथ प्रस्तुत करता है। मदोन्मत्त हाथियों का होना नगर के वनों की समृद्धि और शाही शक्ति का प्रतीक है। बन्दरों का उल्लेख आगामी रामायण कथा में वानरों की भूमिका की ओर संकेत करता है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है “सम्पूर्णमर्यादाम्” – अयोध्या केवल भौतिक रूप से ही नहीं, बल्कि आचार-विचार और धर्म की दृष्टि से भी पूर्ण थी। यह मर्यादाओं से घिरी हुई थी, अर्थात् यहाँ के निवासी धर्म और नीति का पालन करते थे।
यह श्लोक रामायण के मूल संदेश को भी उद्घाटित करता है – राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, और उनकी नगरी भी मर्यादाओं से परिपूर्ण है।
🕉️ आध्यात्मिक संदेश
यह श्लोक हमें सिखाता है कि बाहरी समृद्धि (हाथी-बन्दर) के साथ-साथ आंतरिक मर्यादाओं का होना भी आवश्यक है। मनुष्य का जीवन तभी सार्थक है जब वह मर्यादाओं (सत्य, अहिंसा, धर्म) से घिरा हो। मर्यादाएँ ही हमें पशुओं से श्रेष्ठ बनाती हैं। अयोध्या की भाँति हमें भी अपने जीवन को सम्पूर्ण मर्यादाओं से युक्त बनाना चाहिए।
॥ मर्यादाभिः आवृता अयोध्या, मर्यादाभिः आवृतं जीवनम् ॥
जय श्री राम 🙏