युद्ध काण्ड अध्याय 95 | 0 श्लोक

राम द्वारा सेवकों और मित्रों को उपहार देना

राम अपने सभी सेवकों, मित्रों, और सहयोगियों को उनकी सेवा के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए बहुमूल्य उपहार देते हैं।