उत्तर काण्ड
अध्याय 98 | 0 श्लोक
इंद्र की मुक्ति
देवताओं द्वारा अश्वमेध यज्ञ के अनुष्ठान से इंद्र ब्रह्महत्या के पाप से मुक्त होते हैं। पाप का विभाजन करके अग्नि, नदियों, वृक्षों और स्त्रियों में स्थापित किया जाता है।
अध्याय के सभी श्लोक
इस अध्याय में अभी कोई श्लोक उपलब्ध नहीं है।