किष्किन्धा काण्ड
अध्याय 65 | 0 श्लोक
वानरों का समुद्र लांघने का भय
किष्किन्धाकाण्ड के पैंसठवें सर्ग में वानर सेना का दक्षिण समुद्र तट पर पहुँचना और उसकी अपार विशालता को देखकर निराश होना वर्णित है। अंगद द्वारा उत्साहवर्धन के बावजूद सभी वानर समुद्र लांघने में असमर्थता स्वीकार कर लेते हैं और प्राण त्यागने का निश्चय करते हैं। तब जाम्बवान हनुमान को उनकी दिव्य शक्तियों का स्मरण दिलाकर उन्हें समुद्र लांघने के लिए प्रेरित करते हैं।
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