किष्किन्धा काण्ड अध्याय 61 | 0 श्लोक

सम्पाती की कथा (जारी)

इस सर्ग में सम्पाती अपने जीवन की घटना सुनाते हैं कि कैसे उनके पंख जल गए और वे विन्ध्याचल पर गिरे। फिर वे वानरों को बताते हैं कि उन्होंने रावण को सीता का हरण करते देखा था और लंका की स्थिति का वर्णन करते हैं। वानरों को सीता का पता चल जाता है और वे लंका जाने का संकल्प करते हैं।

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