किष्किन्धा काण्ड अध्याय 60 | 0 श्लोक

सम्पाती अपनी कथा सुनाते हैं

किष्किन्धाकाण्ड के साठवें सर्ग में महापराक्रमी सम्पाती वानरों को अपनी जीवन-गाथा सुनाते हैं – कैसे सूर्य की तपिश से उनके पंख जल गए और वे अपने अनुज जटायु से बिछड़ गए। साथ ही वे सीता के लंका में होने की पुष्टि करते हैं और वानरों को समुद्र पार करने का मार्ग बताते हैं।

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