किष्किन्धा काण्ड अध्याय 28 | 0 श्लोक

वर्षा ऋतु का वर्णन

किष्किन्धाकाण्ड का अट्ठाईसवाँ सर्ग वर्षा ऋतु के आगमन का अद्भुत वर्णन करता है। प्रस्रवण पर्वत पर राम और लक्ष्मण वर्षाकाल व्यतीत कर रहे हैं। प्रकृति के सौन्दर्य को देखकर राम का हृदय सीता के वियोग में और अधिक व्याकुल हो उठता है। यह सर्ग राम के करुण विलाप और वर्षा ऋतु के मनोरम चित्रण के लिए प्रसिद्ध है।

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