🙏 क्यों करूं मैं फिकर – मुझको काहे का डर

(Kyun Karun Main Fikar Lyrics In Hindi) – Ratan Azad Shyam Bhajan 2026 | Haare Ka Sahara

गायक: रतन आज़ाद || गीतकार: नरेश नरसी जी || तर्ज: मेरे रश्के क़मर

📝 भजन विवरण

🎤 गायक: रतन आज़ाद (Ratan Azad)
✍️ गीतकार: नरेश नरसी जी (Naresh Narsi Ji)
🎵 तर्ज: मेरे रश्के क़मर
🏷️ श्रेणी: खाटू श्याम भजन
📍 भाव: विश्वास, समर्पण, कृतज्ञता

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

क्यों करूं मैं फिकर, मुझको काहे का डर,
हारे का ये सहारा, मुझे मिल गया,
हर खुशी मिल गई, हर बला टल गई,
जिंदगी का गुजारा, मुझे मिल गया,
हारे का ये सहारा, मुझे मिल गया॥

तर्ज – मेरे रश्के क़मर

॥ अंतरा १ ॥

जब से कीर्तन में इनके, मैं आने लगा,
श्याम भजनों में मन को, लगाने लगा,
एक लहर सी बदन में, यूँ उठने लगी,
स्वर्ग जैसा नजारा, मुझे मिल गया,
हारे का ये सहारा, मुझे मिल गया॥

॥ अंतरा २ ॥

गम का मारा था मैं, बेसहारा था मैं,
उस घड़ी अपने, जीवन से हारा था मैं,
खुद ब खुद ये कदम, खाटू बढ़ने लगे,
श्याम परिवार सारा, मुझे मिल गया,
हारे का ये सहारा, मुझे मिल गया॥

॥ अंतरा ३ ॥

मुझको जीवन में, जो कुछ भी दौलत मिली,
सांवरे वो तुम्हारी, बदौलत मिली,
मैं भिखारी बना, जब से दरबार का,
सांवरे का इशारा, मुझे मिल गया,
हारे का ये सहारा, मुझे मिल गया॥

॥ अंतरा ४ ॥

हर मुसीबत से 'नरसी', निकाला मुझे,
नैया जो डगमगाई, संभाला मुझे,
डूबने जो लगा, हाथ पकड़ा मेरा,
डूबते को किनारा, मुझे मिल गया,
हारे का ये सहारा, मुझे मिल गया॥

क्यों करूं मैं फिकर, मुझको काहे का डर,
हारे का ये सहारा, मुझे मिल गया,
हर खुशी मिल गई, हर बला टल गई,
जिंदगी का गुजारा, मुझे मिल गया,
हारे का ये सहारा, मुझे मिल गया॥

🎤 गायक :- रतन आज़ाद (Ratan Azad)

✍️ गीतकार :- नरेश नरसी जी (Naresh Narsi Ji)

तर्ज: मेरे रश्के क़मर पर आधारित

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन "क्यों करूं मैं फिकर मुझको काहे का डर" रतन आज़ाद की सुरीली आवाज़ में खाटू श्याम बाबा के प्रति अटूट विश्वास और कृतज्ञता को दर्शाता है। भजन का मूल स्वर एक भक्त का है जिसे श्याम बाबा का सहारा मिल गया है और अब उसे किसी बात की चिंता या डर नहीं है।

"क्यों करूं मैं फिकर, मुझको काहे का डर" – भक्त कहता है कि अब वह चिंता क्यों करे, उसे किस बात का डर? क्योंकि उसे "हारे का सहारा" मिल गया है। श्याम बाबा को हारे का सहारा कहा जाता है, और भक्त को वह सहारा मिल गया है।

"हर खुशी मिल गई, हर बला टल गई" – बाबा के मिलने से हर खुशी मिल गई और हर मुसीबत टल गई। जिंदगी का गुजारा (जीवनयापन का साधन) भी मिल गया।

"जब से कीर्तन में इनके, मैं आने लगा" – भक्त बताता है कि जब से वह श्याम बाबा के कीर्तन में आने लगा और श्याम भजनों में मन लगाने लगा, उसके शरीर में एक लहर सी उठने लगी और उसे स्वर्ग जैसा नजारा मिल गया।

"गम का मारा था मैं, बेसहारा था मैं" – भक्त स्वीकार करता है कि वह दुखों से मारा हुआ था, बेसहारा था, और जीवन से हार चुका था। लेकिन फिर खुद-ब-खुद उसके कदम खाटू की ओर बढ़ने लगे और उसे पूरा श्याम परिवार मिल गया।

"मुझको जीवन में, जो कुछ भी दौलत मिली, सांवरे वो तुम्हारी, बदौलत मिली" – भक्त कहता है कि जीवन में जो कुछ भी उसे धन-दौलत मिली, वह सब सांवरे (श्याम बाबा) की बदौलत मिली। वह जब से दरबार का भिखारी बना, उसे सांवरे का इशारा मिल गया।

"हर मुसीबत से नरसी, निकाला मुझे" – गीतकार नरेश नरसी जी अपने नाम का उल्लेख करते हुए कहते हैं कि बाबा ने उन्हें हर मुसीबत से निकाला, डगमगाती नैया को संभाला, और डूबते हुए को किनारा मिल गया।

🔍 श्याम भजन का विशेष महत्त्व

"हारे का सहारा" – श्याम बाबा की पहचान: खाटू श्याम बाबा को "हारे का सहारा" कहा जाता है। यह भजन इसी विशेषता को केंद्र में रखकर बनाया गया है। भक्त कहता है कि उसे वह सहारा मिल गया है, इसलिए अब उसे किसी बात की चिंता नहीं।

तर्ज: "मेरे रश्के क़मर": यह भजन प्रसिद्ध गज़ल "मेरे रश्के क़मर" की धुन पर बनाया गया है। यह धुन बहुत मधुर और लोकप्रिय है, जिससे यह भजन और भी आकर्षक और यादगार बन गया है।

कीर्तन का महत्व: "जब से कीर्तन में इनके, मैं आने लगा" – यह पंक्ति सामूहिक कीर्तन के महत्व को दर्शाती है। कीर्तन में आने और भजनों में मन लगाने से आध्यात्मिक अनुभूति होती है, एक लहर सी उठती है।

खाटू की ओर खिंचाव: "खुद ब खुद ये कदम, खाटू बढ़ने लगे" – यह पंक्ति बताती है कि जब बाबा बुलाते हैं, तो भक्त के कदम खुद-ब-खुद खाटू की ओर बढ़ने लगते हैं। यह दैवीय खिंचाव का प्रतीक है।

श्याम परिवार: "श्याम परिवार सारा, मुझे मिल गया" – यह भजन में आने वाले सभी भक्तों को श्याम परिवार के रूप में संबोधित करता है। श्याम भक्ति में एक बड़ा परिवार मिल जाता है।

नरसी जी की रचना: गीतकार नरेश नरसी जी ने "नरसी" नाम का उल्लेख करके इस भजन को व्यक्तिगत और हृदयस्पर्शी बना दिया है। वे स्वयं को उस भक्त के रूप में प्रस्तुत करते हैं जिसे बाबा ने हर मुसीबत से निकाला।

रतन आज़ाद का गायन: गायक रतन आज़ाद ने अपनी भावपूर्ण और सुरीली आवाज़ से इस भजन को जीवंत कर दिया है। उनके गायन में वह विश्वास और समर्पण साफ सुनाई देता है जो इस भजन का मूल स्वर है।

💖 हारे का सहारा – श्याम बाबा

🎯 संदेश

इस भजन का मूल संदेश यह है कि जिसे श्याम बाबा का सहारा मिल जाए, उसे किसी बात की चिंता या डर नहीं रहता। बाबा हारे हुए, बेसहारा, गम से मारे हुए लोगों को उठाते हैं, उनकी नैया पार लगाते हैं, डूबते हुए का हाथ पकड़ते हैं और उन्हें किनारा देते हैं। यह भजन हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो जीवन में हार मान चुका है और एक सहारे की तलाश में है।

✨ कृतज्ञता का भाव

क्यों करूं मैं फिकर मुझको काहे का डर केवल एक भजन नहीं, बल्कि कृतज्ञता की वह अभिव्यक्ति है जो एक भक्त के हृदय से निकलती है जब उसे एहसास होता है कि श्याम बाबा ने उसे कितना कुछ दिया है। यह भजन हमें सिखाता है कि बाबा की कृपा से हर खुशी मिलती है, हर बला टलती है, और जीवन का हर गुजारा उन्हीं की बदौलत है। जब बाबा का सहारा मिल जाए, तो फिर चिंता और डर का कोई स्थान नहीं रहता।

🙏 ॐ श्री खाटू श्याम महाराज की जय। हारे का सहारा, श्री श्याम उद्धारा।।

॥ नरेश नरसी जी कृत श्याम भजन ॥
॥ हारे का ये सहारा, मुझे मिल गया ॥

गायक: रतन आज़ाद | गीतकार: नरेश नरसी जी

तर्ज: मेरे रश्के क़मर | Tune: Mere Rashke Qamar