🙏 कलयुग की सच्चाई – साँच कहूँ सूं सांवरिया

(Kalyug Ki Sachai Lyrics In Hindi) – Shyam Bhajan 2026 | Bin Matlab Ke

भीमसैन कृत भजन

📝 भजन विवरण

🎤 शैली: श्याम भजन / खाटू श्याम भजन
🏷️ श्रेणी: भक्ति गीत, प्रेरक भजन
📍 भाव: कलयुग की सच्चाई, निस्वार्थ भक्ति

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

साँच कहूँ सूं सांवरिया मैं,
झूठ बताता ना,
बिन मतलब तो, बिन मतलब तो,
श्याम कोई तेरे दर पे आता ना......

॥ अंतरा १ ॥

झूठ कपट राखें सै मन में,
छप्पन भोग लगावे,
सवामणी का लालच देकर,
काम कराना चावे,
शृद्धा से करमां सा खींचड़,
कोई खुवाता ना,
बिन मतलब तो, अरे बिन मतलब तो,
श्याम कोई तेरे दर पे आता ना......

॥ अंतरा २ ॥

धन दौलत और कोठी बंगला,
माँगे सोना चांदी,
माँगे सोना चांदी, माँगे सोना चांदी,
माया के चक्कर में दुनियाँ,
कितनी हो रही आँधी,
कितनी हो रही आँधी, कितनी हो रही आँधी,
अरे सुदामा सा यार किते कोई टोये (खोजे) पाता ना,
बिन मतलब तो, अरे बिन मतलब तो,
श्याम कोई तेरे दर पे आता ना......

॥ अंतरा ३ ॥

एक मुट्ठी का दान करें सै,
और एड (अड्वॅरटाइजमेन्ट) करे सै भारी,
नहीं तेरेते लुखमाँ (छिपा हुआ) तू जाणे सै सारी,
मीरा नरसी जैसे बनके,
कोई दिखाता ना,
बिन मतलब तो, अरे बिन मतलब तो,
श्याम कोई तेरे दर पे आता ना......

॥ अंतरा ४ ॥

आजकाल कुछ भगत श्याम तेरे,
हो रहे घणे खुदगर्जी,
मान चाहे मत मान श्याम,
आगे तेरी मरजी,
बिन मतलब तो "भीमसैन" तेरे भजण बनाता ना,
बिन मतलब तो श्याम तेरे कोई भजन सुनाता ना,
बिन मतलब तो, अरे बिन मतलब तो,
श्याम कोई तेरे दर पे आता ना......

साँच कहूँ सूं सांवरिया मैं,
झूठ बताता ना,
बिन मतलब तो, बिन मतलब तो,
श्याम कोई तेरे दर पे आता ना......

✍️ रचनाकार :- भीमसैन (भीमसैन कृत)

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन "कलयुग की सच्चाई" आज के समय की कड़वी सच्चाई को उजागर करता है। भक्त सांवरिया (श्याम) से सच कह रहा है कि आज के कलयुग में कोई भी बिना मतलब के श्याम के दरबार में नहीं आता।

"झूठ कपट राखें सै मन में, छप्पन भोग लगावे" – भक्त बताते हैं कि लोग मन में छल-कपट रखते हैं, दिखावे के लिए छप्पन भोग लगाते हैं और सवामणी (मन्नत) का लालच देकर अपना काम निकलवाना चाहते हैं। सच्ची श्रद्धा से कोई खिचड़ी भी नहीं खिलाता।

"धन दौलत और कोठी बंगला, माँगे सोना चांदी" – आज की दुनिया केवल माया के चक्कर में पागल हो रही है। लोग केवल भौतिक सुख-सुविधाएं मांगते हैं। कोई सुदामा जैसा निस्वार्थ मित्र नहीं खोजता जिसने बिना कुछ मांगे केवल प्रेम दिया।

"एक मुट्ठी का दान करें सै, और एड करे सै भारी" – लोग थोड़ा सा दान करके उसका बड़ा प्रचार करवाते हैं, लेकिन छिपे हुए भावों को श्याम ही जानते हैं। मीरा और नरसी जैसे सच्चे भक्त आज कोई दिखाई नहीं देते।

"आजकाल कुछ भगत श्याम तेरे, हो रहे घणे खुदगर्जी" – आज के भक्त स्वार्थी हो गए हैं। अंत में रचनाकार भीमसैन कहते हैं कि वह भी बिना मतलब के भजन नहीं बना रहे - यह कलयुग की सच्चाई को उजागर करने का उनका प्रयास है।

🔍 श्याम भजन का विशेष महत्त्व

कलयुग का आईना: यह भजन आज के समाज का दर्पण है जहाँ हर रिश्ता, हर भक्ति स्वार्थ से प्रेरित है। यह हमें आत्ममंथन करने का अवसर देता है कि हम किस भावना से भगवान के पास जाते हैं।

"बिन मतलब" की पुनरावृत्ति: पूरे भजन में बार-बार आने वाली पंक्ति "बिन मतलब तो श्याम कोई तेरे दर पे आता ना" इस सच्चाई को रेखांकित करती है कि आज की भक्ति में निस्वार्थ भाव लगभग समाप्त हो गया है।

सुदामा, मीरा और नरसी का संदर्भ: भक्ति के इन आदर्श चरित्रों का उल्लेख करके भजन हमें याद दिलाता है कि सच्ची भक्ति कैसी होती थी - निस्वार्थ, प्रेमपूर्ण और बिना किसी अपेक्षा के।

राजस्थानी भाषा का प्रभाव: "साँच कहूँ सूं", "सवामणी", "खींचड़", "खुदगर्जी" जैसे शब्द इस भजन को राजस्थानी लोक शैली से जोड़ते हैं और इसे और अधिक प्रामाणिक बनाते हैं।

💖 निस्वार्थ भक्ति की सीख

🎯 संदेश

इस भजन का मूल संदेश यह है कि सच्ची भक्ति बिना किसी स्वार्थ के होनी चाहिए। भगवान से केवल लेने की भावना नहीं, बल्कि देने और समर्पण की भावना होनी चाहिए। जैसे सुदामा, मीरा और नरसी ने बिना किसी अपेक्षा के प्रेम किया, वैसे ही हमें भी भक्ति करनी चाहिए।

✨ आत्मचिंतन का अवसर

कलयुग की सच्चाई केवल एक भजन नहीं, बल्कि हम सभी के लिए आत्मचिंतन का अवसर है। यह हमसे पूछता है - क्या हम सच में निस्वार्थ भाव से श्याम के दरबार में जाते हैं या केवल अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए? यह भजन हमें अपनी भक्ति की परख करने की प्रेरणा देता है।

🙏 ॐ श्री खाटू श्याम महाराज की जय। हारे का सहारा, श्री श्याम उद्धारा।।

॥ भीमसैन कृत भजन ॥
॥ साँच कहूँ सूं सांवरिया, झूठ बताता ना ।।