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Krishna Bhajan

Rango Ki Bahar Hai Holi Ka Tyohar Hai Lyrics (Krishna Bhajan) – रंगों की बहार हैं, होली का त्यौहार हैं

198 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

🎵 रंगों की बहार हैं, होली का त्यौहार हैं

(Rango Ki Bahar Hai, Holi Ka Tyohar Hai) – Krishna Bhajan 2026

ॐ श्री कृष्णाय नमः ॥ राधे राधे ॥

📝 भजन विवरण

🎤 गायक: पारम्परिक
🏷️ श्रेणी: कृष्ण भजन / होली भजन
🎵 विशेष: प्रेम भावना से युक्त होली भजन

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

रंगो की बहार हैं , होली का त्यौहार हैं ,
आजा मेरे कान्हा आजा , तेरा इंतज़ार हैं ,

॥ अंतरा १ ॥

लाल , गुलाबी, पीला, रंग में लगाऊ ,
होली ये कान्हा, तेरे संग में मनाऊ ,
मुझको तुझसे प्यार हैं , तू मेरा दिलदार हैं ,
आजा मेरे कान्हा आजा , तेरा इंतज़ार हैं ,

॥ स्थायी ॥

रंगो की बहार हैं , होली का त्यौहार हैं ,
आजा मेरे कान्हा आजा , तेरा इंतज़ार हैं ,

॥ अंतरा २ ॥

रंग रंगीला हैं तू , छेल छबीला हैं ,
मुझको पता हैं तू, बड़ा ही रंगीला हैं ,
तुझको भी मुझसे प्यार हैं , तू मेरा दिलदार हैं ,
आजा मेरे कान्हा आजा , तेरा इंतज़ार हैं ,

॥ स्थायी ॥

रंगो की बहार हैं , होली का त्यौहार हैं ,
आजा मेरे कान्हा आजा , तेरा इंतज़ार हैं ,

॥ अंतरा ३ ॥

पिछले बरस की होली , याद हैं मुझको ,
कितना सताया कान्हा , तूने मुझको ,
फिर भी तुझसे प्यार हैं , तू मेरा दिलदार हैं ,
आजा मेरे कान्हा आजा , तेरा इंतज़ार हैं ,

॥ स्थायी ॥

रंगो की बहार हैं , होली का त्यौहार हैं ,
आजा मेरे कान्हा आजा , तेरा इंतज़ार हैं ,

॥ राधे कृष्ण राधे कृष्ण कृष्ण कृष्ण राधे राधे ॥

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन एक भक्त की कान्हा (कृष्ण) के प्रति गहरी प्रेम भावना और होली के अवसर पर उनके आने की प्रतीक्षा को दर्शाता है। "रंगो की बहार हैं, होली का त्यौहार हैं, आजा मेरे कान्हा आजा, तेरा इंतज़ार हैं" – भक्त कहता है कि चारों ओर रंगों की बहार है और होली का त्यौहार आ गया है, लेकिन उसके कान्हा नहीं आए, इसलिए वह उनका इंतज़ार कर रही है।

भक्त कान्हा को लाल, गुलाबी और पीले रंग में रंगना चाहती है और उनके संग होली मनाना चाहती है। वह कहती है कि उसे कान्हा से प्यार है और वे उसके दिलदार हैं।

कान्हा को "रंग रंगीला" और "छेल छबीला" (सुंदर और आकर्षक) कहा गया है। भक्त को पता है कि कान्हा बड़े ही रंगीले हैं, और उन्हें भी भक्त से प्यार है।

पिछले बरस की होली याद करते हुए भक्त कहता है कि कान्हा ने उसे बहुत सताया था, फिर भी उसका प्यार कम नहीं हुआ। वह फिर से उनके आने की प्रतीक्षा कर रही है।

यह भजन हमें सिखाता है कि भक्त और भगवान के बीच का प्रेम सभी बाधाओं से परे होता है। होली का त्यौहार तो बहाना है, असली बात है कान्हा से मिलने की लालसा।

🎨 होली और कृष्ण का संबंध

कृष्ण और होली: होली का पर्व भगवान कृष्ण से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह माना जाता है कि कृष्ण ने सबसे पहले ब्रज में होली खेली थी। वे अपनी गोपियों और विशेष रूप से राधा के साथ रंगों से होली खेलते थे।

रंगों का महत्व: कृष्ण को "रंग रंगीला" कहा जाता है क्योंकि वे हमेशा रंगों में डूबे रहते थे। उनकी लीलाएँ रंगीन और मनमोहक थीं। इस भजन में भक्त उन्हीं रंगों में रंगना चाहती है।

प्रतीक्षा का भाव: भक्त का कान्हा के आने की प्रतीक्षा करना यह दर्शाता है कि हर आत्मा परमात्मा के मिलन की प्रतीक्षा में है। होली का पर्व उस मिलन का प्रतीक बन जाता है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

🎨 रंगों का प्रतीकवाद

लाल, गुलाबी, पीला – ये रंग प्रेम, सौंदर्य और आनंद के प्रतीक हैं। भक्त कान्हा को इन्हीं रंगों में रंगना चाहती है, यानि अपने प्रेम से रंग देना चाहती है।

💕 दिलदार कान्हा

"तू मेरा दिलदार हैं" – कान्हा को दिलदार कहकर भक्त उनके प्रति अपने हृदय के गहरे लगाव को व्यक्त करती है। दिलदार का अर्थ है दिल देने वाला, प्रेम करने वाला।

😊 छेल छबीला कान्हा

"छेल छबीला" का अर्थ है सुंदर, आकर्षक और श्रृंगार प्रिय। कृष्ण के इस रूप का वर्णन भक्तों को अत्यंत प्रिय है।

😊 प्यार भरी शिकायत

"पिछले बरस की होली, याद हैं मुझको, कितना सताया कान्हा तूने मुझको" – यह पंक्तियाँ प्रेमिका की प्रियतम से प्यार भरी शिकायत को दर्शाती हैं, जो प्रेम को और गहरा करती है।

🎯 संदेश : होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम के मिलन का उत्सव है। भक्त की आत्मा सदा कान्हा के मिलन की प्रतीक्षा करती है। चाहे कितना भी सताया जाए, प्रेम कम नहीं होता। प्रेम ही सबसे बड़ा रंग है जो जीवन को रंगीन बना देता है।

ॐ श्री कृष्णाय नमः ॥ इति कृष्णभजनम् ॥
॥ राधे कृष्ण राधे कृष्ण कृष्ण कृष्ण राधे राधे ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "Rango Ki Bahar Hai Holi Ka Tyohar Hai Lyrics (Krishna Bhajan) – रंगों की बहार हैं, होली का त्यौहार हैं" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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