🎵 रंगों की बहार हैं, होली का त्यौहार हैं
(Rango Ki Bahar Hai, Holi Ka Tyohar Hai) – Krishna Bhajan 2026
📝 भजन विवरण
📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)
॥ स्थायी ॥
रंगो की बहार हैं , होली का त्यौहार हैं ,
आजा मेरे कान्हा आजा , तेरा इंतज़ार हैं ,
॥ अंतरा १ ॥
लाल , गुलाबी, पीला, रंग में लगाऊ ,
होली ये कान्हा, तेरे संग में मनाऊ ,
मुझको तुझसे प्यार हैं , तू मेरा दिलदार हैं ,
आजा मेरे कान्हा आजा , तेरा इंतज़ार हैं ,
॥ स्थायी ॥
रंगो की बहार हैं , होली का त्यौहार हैं ,
आजा मेरे कान्हा आजा , तेरा इंतज़ार हैं ,
॥ अंतरा २ ॥
रंग रंगीला हैं तू , छेल छबीला हैं ,
मुझको पता हैं तू, बड़ा ही रंगीला हैं ,
तुझको भी मुझसे प्यार हैं , तू मेरा दिलदार हैं ,
आजा मेरे कान्हा आजा , तेरा इंतज़ार हैं ,
॥ स्थायी ॥
रंगो की बहार हैं , होली का त्यौहार हैं ,
आजा मेरे कान्हा आजा , तेरा इंतज़ार हैं ,
॥ अंतरा ३ ॥
पिछले बरस की होली , याद हैं मुझको ,
कितना सताया कान्हा , तूने मुझको ,
फिर भी तुझसे प्यार हैं , तू मेरा दिलदार हैं ,
आजा मेरे कान्हा आजा , तेरा इंतज़ार हैं ,
॥ स्थायी ॥
रंगो की बहार हैं , होली का त्यौहार हैं ,
आजा मेरे कान्हा आजा , तेरा इंतज़ार हैं ,
॥ राधे कृष्ण राधे कृष्ण कृष्ण कृष्ण राधे राधे ॥
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह भजन एक भक्त की कान्हा (कृष्ण) के प्रति गहरी प्रेम भावना और होली के अवसर पर उनके आने की प्रतीक्षा को दर्शाता है। "रंगो की बहार हैं, होली का त्यौहार हैं, आजा मेरे कान्हा आजा, तेरा इंतज़ार हैं" – भक्त कहता है कि चारों ओर रंगों की बहार है और होली का त्यौहार आ गया है, लेकिन उसके कान्हा नहीं आए, इसलिए वह उनका इंतज़ार कर रही है।
भक्त कान्हा को लाल, गुलाबी और पीले रंग में रंगना चाहती है और उनके संग होली मनाना चाहती है। वह कहती है कि उसे कान्हा से प्यार है और वे उसके दिलदार हैं।
कान्हा को "रंग रंगीला" और "छेल छबीला" (सुंदर और आकर्षक) कहा गया है। भक्त को पता है कि कान्हा बड़े ही रंगीले हैं, और उन्हें भी भक्त से प्यार है।
पिछले बरस की होली याद करते हुए भक्त कहता है कि कान्हा ने उसे बहुत सताया था, फिर भी उसका प्यार कम नहीं हुआ। वह फिर से उनके आने की प्रतीक्षा कर रही है।
यह भजन हमें सिखाता है कि भक्त और भगवान के बीच का प्रेम सभी बाधाओं से परे होता है। होली का त्यौहार तो बहाना है, असली बात है कान्हा से मिलने की लालसा।
🎨 होली और कृष्ण का संबंध
कृष्ण और होली: होली का पर्व भगवान कृष्ण से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह माना जाता है कि कृष्ण ने सबसे पहले ब्रज में होली खेली थी। वे अपनी गोपियों और विशेष रूप से राधा के साथ रंगों से होली खेलते थे।
रंगों का महत्व: कृष्ण को "रंग रंगीला" कहा जाता है क्योंकि वे हमेशा रंगों में डूबे रहते थे। उनकी लीलाएँ रंगीन और मनमोहक थीं। इस भजन में भक्त उन्हीं रंगों में रंगना चाहती है।
प्रतीक्षा का भाव: भक्त का कान्हा के आने की प्रतीक्षा करना यह दर्शाता है कि हर आत्मा परमात्मा के मिलन की प्रतीक्षा में है। होली का पर्व उस मिलन का प्रतीक बन जाता है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व
🎨 रंगों का प्रतीकवाद
लाल, गुलाबी, पीला – ये रंग प्रेम, सौंदर्य और आनंद के प्रतीक हैं। भक्त कान्हा को इन्हीं रंगों में रंगना चाहती है, यानि अपने प्रेम से रंग देना चाहती है।
💕 दिलदार कान्हा
"तू मेरा दिलदार हैं" – कान्हा को दिलदार कहकर भक्त उनके प्रति अपने हृदय के गहरे लगाव को व्यक्त करती है। दिलदार का अर्थ है दिल देने वाला, प्रेम करने वाला।
😊 छेल छबीला कान्हा
"छेल छबीला" का अर्थ है सुंदर, आकर्षक और श्रृंगार प्रिय। कृष्ण के इस रूप का वर्णन भक्तों को अत्यंत प्रिय है।
😊 प्यार भरी शिकायत
"पिछले बरस की होली, याद हैं मुझको, कितना सताया कान्हा तूने मुझको" – यह पंक्तियाँ प्रेमिका की प्रियतम से प्यार भरी शिकायत को दर्शाती हैं, जो प्रेम को और गहरा करती है।
🎯 संदेश : होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम के मिलन का उत्सव है। भक्त की आत्मा सदा कान्हा के मिलन की प्रतीक्षा करती है। चाहे कितना भी सताया जाए, प्रेम कम नहीं होता। प्रेम ही सबसे बड़ा रंग है जो जीवन को रंगीन बना देता है।