🎵 कन्हैया तेरी याद में रोई रे

(Kanhaiya Teri Yaad Mein Royi Re) – Krishna Bhajan 2026

ॐ श्री कृष्णाय नमः ॥ राधे राधे ॥

📝 भजन विवरण

🎤 गायक: पारम्परिक
🏷️ श्रेणी: कृष्ण भजन / विरह भजन
🎵 धुन आधारित: कन्हैया ले चल पारली पार

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ धुन ॥

कन्हईया ले चल पारली पार

॥ स्थायी ॥

कन्हैया तेरी, याद में, रोई रे ॥
तुम तो, बस गए, मथुरा नगरिया ॥
पागल, हो गई रे...
कन्हईया तेरी, याद में, रोई रे...

॥ अंतरा १ ॥

तुम, तो कान्हा, बड़े हो छलिया ।
छल के, गए तुम, मथुरा नगरिया ॥
बरसाने की, राधा प्यारी ॥
जोगन, हो गई रे,
कन्हईया तेरी, याद में, रोई रे...

॥ अंतरा २ ॥

ओ, कान्हा मुझे, भूल न जाना ।
वादा, पूरा, करके दिखाना ॥
तुम, बिन मेरी, ओ साँवरिया ॥
दिल की, धड़कन, रुक गई रे,
कन्हईया तेरी, याद में, रोई रे...

॥ अंतरा ३ ॥

आ के, देख, मेरे मन मोहन ।
सूना, है, सारा यह उपवन ॥
गईंयाँ, तेरी, याद में, रह कर ॥
भूखी, मर गई रे,
कन्हईया तेरी, याद में, रोई रे...

॥ राधे कृष्ण राधे कृष्ण कृष्ण कृष्ण राधे राधे ॥

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन राधा के कृष्ण विरह की गहरी व्यथा को दर्शाता है। "कन्हैया तेरी याद में रोई रे" – राधा कहती हैं कि वह कन्हैया की याद में रो रही हैं। कृष्ण तो मथुरा नगरी में बस गए और राधा उनके विरह में पागल हो गई हैं।

राधा कृष्ण को "छलिया" कहती हैं – धोखेबाज़, जो छल करके मथुरा चले गए। बरसाने की प्यारी राधा अब जोगन (योगिनी) हो गई हैं – संन्यासिनी की तरह विरह में तप रही हैं।

वह कृष्ण से विनती करती हैं – "ओ कान्हा मुझे भूल न जाना, वादा पूरा करके दिखाना"। उनके बिना उसके दिल की धड़कन रुक गई है। वह कृष्ण से आने का आग्रह करती हैं कि आकर देखें कि उनके बिना यह उपवन कितना सूना हो गया है।

अंत में वह कहती हैं कि उनकी गायें भी कृष्ण की याद में रहकर भूखी मर गईं – यह दर्शाता है कि कृष्ण के बिना सब कुछ बेजान हो गया है।

यह भजन राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम और विरह की गहन व्यथा को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करता है। यह हमें सिखाता है कि प्रेम में विरह भी उतना ही गहरा होता है जितना मिलन। कृष्ण के बिना राधा का जीवन सूना है, और वह केवल उनकी याद में जी रही हैं।

📍 राधा-कृष्ण का विरह – प्रेम की पराकाष्ठा

मथुरा प्रस्थान: कृष्ण ने ब्रज छोड़कर मथुरा जाने के बाद राधा और गोपियों का विरह अत्यंत प्रसिद्ध है। यह विरह भक्ति साहित्य में प्रेम की सर्वोच्च अभिव्यक्ति माना जाता है।

जोगन राधा: राधा को "जोगन" कहना इस बात का प्रतीक है कि वे कृष्ण के विरह में तपस्विनी बन गईं। उनका जीवन अब केवल कृष्ण के ध्यान और स्मरण में बीतता है।

गईंयाँ (गायें): कृष्ण गोपाल थे, गायों से उनका अटूट प्रेम था। गायों का भूखी मरना इस बात का प्रतीक है कि कृष्ण के बिना पूरा ब्रज ही बेजान हो गया।

उपवन का सूनापन: ब्रज के उपवन जहाँ कभी रासलीला होती थी, अब कृष्ण के बिना सूने और नीरस हो गए हैं।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

💔 विरह की व्यथा

"कन्हैया तेरी याद में रोई रे" – यह पंक्ति प्रेमिका के हृदय की गहरी पीड़ा को दर्शाती है। याद ही एकमात्र सहारा है, और यही याद रुलाती भी है।

🎭 छलिया कान्हा

कृष्ण को "छलिया" कहना प्रेमिका की नाराज़गी और प्रेम का मिश्रित भाव है। वह जानती हैं कि कृष्ण ने छल किया, फिर भी उनसे प्रेम है।

🧘 जोगन राधा

राधा का जोगन होना इस बात का प्रतीक है कि सच्चा प्रेम ही सबसे बड़ी तपस्या है। विरह में भी प्रिय का स्मरण ही जीवन है।

🐄 गायों का विरह

गायों का भूखी मरना दर्शाता है कि कृष्ण का प्रभाव केवल मनुष्यों पर ही नहीं, बल्कि समस्त प्राणियों पर था। उनके बिना सब अधूरा है।

🎯 संदेश : सच्चा प्रेम विरह में भी जीवित रहता है। राधा का कृष्ण के प्रति प्रेम इतना गहरा है कि वह उनकी याद में ही जी रही हैं, रो रही हैं, और जोगन बन गई हैं। यह प्रेम की वह पराकाष्ठा है जहाँ प्रिय की याद ही प्रिय का स्वरूप बन जाती है।

ॐ श्री कृष्णाय नमः ॥ इति कृष्णभजनम् ॥
॥ राधे कृष्ण राधे कृष्ण कृष्ण कृष्ण राधे राधे ॥