संक्षेप रामायण – श्लोक 79
संस्कृत श्लोक
रामायणरसास्वादी रामभक्तिपरायणः । स मुच्यते भवाब्धेस्तु रामप्रसादतः सदा ॥
हिंदी अनुवाद
रामायण के रस का आस्वादन करने वाला और रामभक्ति में तत्पर व्यक्ति राम की कृपा से सदा के लिए भवसागर से मुक्त हो जाता है।
अर्थ / व्याख्या
रामायण रस का आनन्द लेने वाला रामभक्त भवसागर से पार हो जाता है।
टिप्पणी
यह श्लोक रामायण के रस का आनन्द लेने के फल का वर्णन करता है।
॥ श्लोक ७९ – रामायण रसास्वादन से भवसागर से मुक्ति ॥
🔹 हिन्दी अनुवाद : रामायण के रस का आस्वादन करने वाला और रामभक्ति में तत्पर व्यक्ति राम की कृपा से सदा के लिए भवसागर से मुक्त हो जाता है।
🔹 English Translation : One who relishes the essence of the Ramayana and is devoted to Rama, he is liberated from the ocean of existence by the grace of Rama, forever.
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| रामायणरसास्वादी | विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | रामायण के रस का आस्वादन करने वाला |
| रामभक्तिपरायणः | विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | रामभक्ति में तत्पर |
| सः | सर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | वह |
| मुच्यते | लट्लकार कर्मणि, प्रथमपुरुष एकवचन (मुच् धातु) | मुक्त होता है |
| भवाब्धेः | पुल्लिंग, पञ्चमी एकवचन (भव + अब्धि) | भवसागर से |
| तु | अव्यय | तो |
| रामप्रसादतः | पुल्लिंग, पञ्चमी एकवचन | राम की कृपा से |
| सदा | अव्यय | सदा |
📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व
यह श्लोक रामायण के अध्ययन को "रसास्वाद" कहता है – अर्थात् रामायण का पाठ या श्रवण केवल पुण्य कमाने के लिए नहीं, बल्कि उसके रस (आनन्द) का अनुभव करने के लिए करना चाहिए। रामायण में निहित करुण, शृंगार, वीर, अद्भुत आदि रसों का आस्वादन करने वाला व्यक्ति रामभक्त हो जाता है। ऐसा व्यक्ति राम की कृपा से भवसागर (जन्म-मृत्यु के चक्र) से मुक्त हो जाता है।
रामप्रसाद – राम की कृपा – यहाँ मुक्ति का कारण बताई गई है। रामायण के रस का आनन्द लेने से राम प्रसन्न होते हैं और अपनी कृपा से भक्त को मुक्त कर देते हैं। यह भक्ति मार्ग का सिद्धान्त है – भगवान् की कृपा ही मुक्ति का एकमात्र साधन है।
आध्यात्मिक दृष्टि से, रामायण का रस आत्मिक आनन्द है, जो संसार के भोगों से कहीं अधिक स्थायी और तृप्तिदायक है।
॥ रामायणरसास्वादी भवाब्धिं तरते नरः ॥
जय श्री राम 🙏