राम की कहानी – श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

रात्रौ लङ्काप्रवेशं च एकस्यापि विचिन्तनम् । आपानभूमिगमनमवरोधस्य दर्शनम् ॥

हिंदी अनुवाद

रात्रि में लंका में प्रवेश, अकेले (सीता के विषय में) चिंतन, मदिरालय (आपानभूमि) में जाना और अन्तःपुर (अवरोध) का दर्शन।

अर्थ / व्याख्या

हनुमान ने रात के समय लंका में प्रवेश किया और सीता की खोज के लिए अकेले ही योजना बनाई। उन्होंने रावण के मदिरालय (आपानभूमि) का भ्रमण किया और फिर अन्तःपुर (रानियों के निवास) को देखा।

टिप्पणी

हनुमान की बुद्धिमत्ता और रणनीति का परिचायक है यह श्लोक। उन्होंने रात्रि के अंधेरे का लाभ उठाकर नगर में प्रवेश किया। एकाकी चिंतन उनके गंभीर और विवेकशील स्वभाव को दर्शाता है। आपानभूमि और अन्तःपुर का भ्रमण उनकी खोज की व्यवस्थित पद्धति को बताता है।

॥ श्री रामायण – बाल काण्ड – अध्याय ३ – श्लोक २९ ॥

रात्रौ लङ्काप्रवेशं च एकस्यापि विचिन्तनम् । आपानभूमिगमनमवरोधस्य दर्शनम् ॥
rātrau laṅkāpraveśaṃ ca ekasyāpi vicintanam | āpānabhūmigamanam avarodhasya darśanam ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : रात्रि में लंका में प्रवेश, अकेले (सीता के विषय में) चिंतन, मदिरालय (आपानभूमि) में जाना और अन्तःपुर (अवरोध) का दर्शन।

🔹 English Translation : Entering Lanka at night, contemplating alone (about Sita), going to the drinking hall, and seeing the inner apartments (of the palace).

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
रात्रौस्त्रीलिंग, सप्तमी एकवचनरात्रि में
लङ्काप्रवेशम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनलंका में प्रवेश
अव्ययऔर
एकस्यविशेषण, पुल्लिंग, षष्ठी एकवचनअकेले का
अपिअव्ययभी
विचिन्तनम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनचिंतन, सोच-विचार
आपानभूमिगमनम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनआपानभूमि (मदिरालय) में जाना
अवरोधस्यपुल्लिंग, षष्ठी एकवचनअवरोध (अन्तःपुर, जनानखाना) का
दर्शनम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनदर्शन, देखना

📖 व्याख्या एवं महत्व

यह श्लोक हनुमान के लंका अभियान के उस चरण का वर्णन करता है जहाँ वे सीता की खोज में जुटे। उन्होंने रात्रि के समय लंका में प्रवेश किया, जो उनकी चतुराई को दर्शाता है क्योंकि अंधेरे में उनके पकड़े जाने की संभावना कम थी। लंका की विशालता और वैभव को देखकर भी वे विचलित नहीं हुए। उन्होंने एकान्त में बैठकर सीता के संभावित स्थानों के बारे में गहन चिंतन किया। उनकी योजना बहुत व्यवस्थित थी। सबसे पहले उन्होंने रावण के आपानभूमि (मदिरालय) का निरीक्षण किया, क्योंकि उन्हें लगा कि सीता को वहाँ रखा जा सकता है। लेकिन वहाँ केवल निद्रामग्न राक्षस और राक्षसियाँ थीं। इसके बाद वे अवरोध (अन्तःपुर) में गए, जहाँ रावण की रानियाँ निवास करती थीं। यह एक अत्यंत जोखिम भरा कार्य था क्योंकि यह रावण के निजी क्षेत्र में प्रवेश के समान था। हनुमान ने यहाँ भी साहस और विवेक से काम लिया। उन्होंने रावण की निद्रा का लाभ उठाकर पूरे अन्तःपुर का बारीकी से निरीक्षण किया, लेकिन वहाँ भी सीता नहीं मिलीं। यह खोज उनके धैर्य और समर्पण को दर्शाती है। उन्होंने हर संभव स्थान की तलाश की, चाहे वह कितना भी दुर्गम या संवेदनशील क्यों न हो।

यह हिस्सा हमें सिखाता है कि किसी भी कार्य को करने से पहले उसकी योजना बनाना और फिर उसे धैर्यपूर्वक क्रियान्वित करना कितना आवश्यक है। हनुमान ने बिना घबराए, चरणबद्ध तरीके से अपनी खोज जारी रखी।