संक्षेप रामायण – श्लोक 61

संस्कृत श्लोक

इदं रामायणं कृत्स्नं रामस्य चरितं महत् । पठतः पापं नश्यति शृण्वतः सुखमश्नुते ॥

हिंदी अनुवाद

यह सम्पूर्ण रामायण राम का महान् चरित्र है। इसे पढ़ने वाले के पाप नष्ट हो जाते हैं और सुनने वाले को सुख की प्राप्ति होती है।

अर्थ / व्याख्या

रामायण के पाठ और श्रवण के फल का वर्णन – पापनाश और सुखप्राप्ति।

टिप्पणी

यह श्लोक रामायण के महात्म्य का वर्णन करता है, जो संक्षेप रामायण के अन्तिम भाग में आता है।

॥ श्लोक ६१ – रामायण का महात्म्य (पापनाश और सुख) ॥

इदं रामायणं कृत्स्नं रामस्य चरितं महत् । पठतः पापं नश्यति शृण्वतः सुखमश्नुते ॥
idaṃ rāmāyaṇaṃ kṛtsnaṃ rāmasya caritaṃ mahat | paṭhataḥ pāpaṃ naśyati śṛṇvataḥ sukham aśnute ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : यह सम्पूर्ण रामायण राम का महान् चरित्र है। इसे पढ़ने वाले के पाप नष्ट हो जाते हैं और सुनने वाले को सुख की प्राप्ति होती है।

🔹 English Translation : This entire Ramayana is the great character of Rama. For the one who recites it, sins perish; for the one who hears it, happiness is attained.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
इदम्सर्वनाम, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचनयह
रामायणम्नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचनरामायण
कृत्स्नम्विशेषण, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचनसम्पूर्ण
रामस्यपुल्लिंग, षष्ठी एकवचनराम का
चरितम्नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचनचरित्र
महत्विशेषण, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचनमहान्
पठतःशतृप्रत्यय, पुल्लिंग, षष्ठी एकवचनपढ़ने वाले के
पापम्नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचनपाप
नश्यतिलट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (नश् धातु)नष्ट होता है
शृण्वतःशतृप्रत्यय, पुल्लिंग, षष्ठी एकवचनसुनने वाले के
सुखम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनसुख
अश्नुतेलट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (अश् धातु)प्राप्त होता है

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

यह श्लोक बालकाण्ड के प्रथम सर्ग के उत्तरार्ध का है, जहाँ नारद जी के कथन के बाद वाल्मीकि जी इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि रामायण का पाठ और श्रवण अत्यन्त फलदायी है। रामायण को स्मरण करने मात्र से पापों का नाश होता है और सुख की प्राप्ति होती है। यह भारतीय संस्कृति की वह धारणा है कि भगवान् के चरित्र का कीर्तन करने से मनुष्य पवित्र हो जाता है। रामायण में वाल्मीकि ने स्वयं इसके पाठ के फल का वर्णन किया है। यह श्लोक उस फलश्रुति का प्रारम्भ है।

आध्यात्मिक दृष्टि से, रामायण का पाठ करने से मनुष्य के मन से विकार दूर होते हैं और सात्विक भाव जाग्रत होते हैं। राम के चरित्र में दया, करुणा, सत्य, धर्म आदि सभी सद्गुण निहित हैं, जिनके स्मरण से व्यक्ति सद्गुणों को आत्मसात करता है।

इस श्लोक का पाठ करने से पापों से मुक्ति और सुख की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि रामायण का पाठ श्रद्धापूर्वक किया जाता है।

📖 पाठ की विधि एवं लाभ

इस श्लोक का पाठ प्रतिदिन सुबह-शाम करना चाहिए। विशेषकर रामनवमी, दीपावली आदि पर्वों पर इसका विशेष महत्व है।

॥ रामायणं पठन् नित्यं सर्वपापैः प्रमुच्यते ॥

जय श्री राम 🙏