राम की कहानी – श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

रामलक्ष्मणसीताभी राज्ञा दशरथेन च । सभार्येण सराष्ट्रेण यत् प्राप्तं तत्र तत्त्वतः ॥

हिंदी अनुवाद

राम, लक्ष्मण, सीता के साथ-साथ राजा दशरथ द्वारा, पत्नी (कौसल्या आदि) सहित और राष्ट्र सहित जो कुछ भी प्राप्त किया गया (अनुभव किया गया), उस सबको वहाँ (ध्यान में) तत्त्वतः देखते हैं।

अर्थ / व्याख्या

इस श्लोक में वाल्मीकि अपने ध्यान में राम, लक्ष्मण, सीता, दशरथ, उनकी पत्नियों और सम्पूर्ण राज्य के साथ घटित समस्त घटनाओं का यथार्थ दर्शन करते हैं।

टिप्पणी

तृतीय श्लोक में वाल्मीकि के योगजन्य दर्शन का विस्तार आरंभ होता है। वे केवल राम को ही नहीं, बल्कि लक्ष्मण, सीता, दशरथ, उनकी पत्नियाँ (सभार्येण) और सम्पूर्ण अयोध्या राज्य (सराष्ट्रेण) को भी उनके साथ देखते हैं।

॥ श्रीमद्वाल्मीकियरामायणे बालकाण्डे तृतीयः सर्गः श्लोक ३ ॥

रामलक्ष्मणसीताभी राज्ञा दशरथेन च ।
सभार्येण सराष्ट्रेण यत् प्राप्तं तत्र तत्त्वतः ॥
rāmalakṣmaṇasītābhi rājñā daśarathena ca |
sabhāryeṇa sarāṣṭreṇa yat prāptaṃ tatra tattvataḥ ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : राम, लक्ष्मण, सीता के साथ-साथ राजा दशरथ द्वारा, पत्नी (कौसल्या आदि) सहित और राष्ट्र सहित जो कुछ भी प्राप्त किया गया (अनुभव किया गया), उस सबको वहाँ (ध्यान में) तत्त्वतः देखते हैं।

🔹 English Translation : Together with Rama, Lakshmana, Sita, and King Dasharatha, along with his wives and the kingdom, whatever was attained (experienced) there (in meditation), he sees in reality.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
रामलक्ष्मणसीताभिःतृतीया बहुवचन (राम+लक्ष्मण+सीता)राम, लक्ष्मण और सीता के साथ
राज्ञापुल्लिंग, तृतीया एकवचनराजा के द्वारा
दशरथेनपुल्लिंग, तृतीया एकवचनदशरथ के द्वारा
अव्ययऔर
सभार्येणविशेषण, पुल्लिंग, तृतीया एकवचन (सह+भार्या)पत्नी सहित
सराष्ट्रेणविशेषण, पुल्लिंग, तृतीया एकवचन (सह+राष्ट्र)राष्ट्र सहित
यत्सर्वनाम, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनजो कुछ
प्राप्तम्क्रिया (भूतकालिक कृदंत)प्राप्त किया गया (अनुभव किया गया)
तत्रअव्ययवहाँ (ध्यान में)
तत्त्वतःअव्ययतत्त्व से, यथार्थ रूप में

📜 श्लोक का सन्दर्भ एवं व्याख्या

इस श्लोक में वाल्मीकि के ध्यान में रामायण के सम्पूर्ण परिवार और राज्य का साक्षात्कार होता है। वे केवल मुख्य पात्रों को ही नहीं, बल्कि राजा दशरथ, उनकी पत्नियाँ (कौसल्या, सुमित्रा, कैकेयी) और पूरे अयोध्या साम्राज्य को भी उनके साथ देखते हैं। "प्राप्तम्" शब्द से पता चलता है कि यह केवल दृश्य नहीं है, बल्कि उन घटनाओं का साक्षात अनुभव है। "तत्त्वतः" का अर्थ है यथार्थ रूप में, अर्थात वाल्मीकि किसी कल्पना या भ्रम में नहीं, बल्कि वास्तविकता के साक्षात्कार में हैं।

यह श्लोक योगशक्ति के प्रभाव को दर्शाता है, जिसके द्वारा मुनि भूत, भविष्य और वर्तमान को एक साथ देख सकते हैं। वे राम के पूरे जीवन को, उनके परिवार और राज्य के साथ घटित होते हुए, साक्षात् अनुभव कर रहे हैं।

✨ विशेष तथ्य: "सभार्येण सराष्ट्रेण" यहाँ विशेष महत्व रखता है। यह दर्शाता है कि राम की कथा केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज से जुड़ी हुई है। वाल्मीकि ने सम्पूर्णता में इसका दर्शन किया।

📖 आध्यात्मिक संदेश

इस श्लोक से हमें यह शिक्षा मिलती है कि सच्चा ज्ञान और दृष्टि केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसके सम्पूर्ण परिवेश और समाज को समाहित करती है। वाल्मीकि की योग दृष्टि ने उन्हें राम के सम्पूर्ण लोक का दर्शन कराया। यह हमें सिखाता है कि किसी भी घटना या व्यक्ति को समग्रता में देखना चाहिए, न कि खंडित रूप में।

॥ समग्र दृष्टि ही यथार्थ दृष्टि है ॥

जय श्री राम 🙏