अयोध्या का वर्णन – श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

दुर्गगम्भीरपरिखां दुर्गामन्यैर्दुरासदाम्। वाजिवारणसम्पूर्णां गोभिरुष्टैः खरैस्तथा॥

हिंदी अनुवाद

उसके चारों ओर गहरी खाई खुदी थी, जिसमें प्रवेश करना या जिसे लाँघना अत्यन्त कठिन था। वह नगरी दूसरों के लिये सर्वथा दुर्गम एवं दुर्जय थी। घोड़े, हाथी, गाय-बैल, ऊँट तथा गदहे आदि उपयोगी पशुओं से वह पुरी भरी-पूरी थी।

अर्थ / व्याख्या

यह श्लोक अयोध्या की अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था और पशु-धन की समृद्धि का वर्णन करता है। गहरी खाई शत्रुओं के लिए बाधा थी। विविध पशु परिवहन, कृषि और सैन्य आवश्यकताओं की पूर्ति करते थे।

टिप्पणी

प्राचीन नगरों की सुरक्षा में खाई का बहुत महत्व था। यह न केवल शत्रु की गति रोकती थी, बल्कि जल की आपूर्ति का भी स्रोत होती थी। गाय, घोड़े, हाथी आदि पशु अर्थव्यवस्था और सेना के अभिन्न अंग थे।

॥ श्रीरामायण बालकाण्ड सर्ग ५ श्लोक १३ ॥

दुर्गगम्भीरपरिखां दुर्गामन्यैर्दुरासदाम् ।
वाजिवारणसम्पूर्णां गोभिरुष्टैः खरैस्तथा ॥
durgagambhīraparikhāṃ durgāmanyairdurāsadām |
vājivāraṇasampūrṇāṃ gobhiruṣṭaiḥ kharaistathā ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : उसके चारों ओर गहरी खाई खुदी थी, जिसमें प्रवेश करना या जिसे लाँघना अत्यन्त कठिन था। वह नगरी दूसरों के लिये सर्वथा दुर्गम एवं दुर्जय थी। घोड़े, हाथी, गाय-बैल, ऊँट तथा गदहे आदि उपयोगी पशुओं से वह पुरी भरी-पूरी थी।

🔹 English Translation : It had a deep moat around it, which was extremely difficult to enter or cross. The city was completely inaccessible and unconquerable for others. It was filled with horses, elephants, cows, bulls, camels, and donkeys – all useful animals.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
दुर्गगम्भीरपरिखाम्विशेषण, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचनदुर्गम और गहरी खाई से युक्त
दुर्गाम्विशेषण, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचनदुर्गम, जहाँ पहुँचना कठिन हो
अन्यैःसर्वनाम, पुल्लिंग, तृतीया बहुवचनदूसरों के द्वारा
दुरासदाम्विशेषण, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचनजिसके पास पहुँचना कठिन हो
वाजिवारणसम्पूर्णाम्विशेषण, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचनघोड़ों और हाथियों से परिपूर्ण
गोभिःस्त्रीलिंग, तृतीया बहुवचनगायों से
उष्ट्रैःपुल्लिंग, तृतीया बहुवचनऊँटों से
खरैःपुल्लिंग, तृतीया बहुवचनगदहों से
तथाअव्ययइसी प्रकार

📜 श्लोक का ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

यह श्लोक अयोध्या की सैन्य अभेद्यता और आर्थिक समृद्धि का वर्णन करता है। गहरी खाई (परिखा) नगर की प्रथम पंक्ति की सुरक्षा थी। दुर्गम और दुरासद शब्द बताते हैं कि शत्रु नगर में प्रवेश नहीं कर सकते थे। पशुधन की विविधता से पता चलता है कि अयोध्या कृषि, परिवहन और युद्ध की दृष्टि से आत्मनिर्भर थी। घोड़े और हाथी सेना के अंग थे; गाय, ऊँट, गदहे माल ढुलाई और कृषि में सहायक थे।

वाल्मीकि ने अयोध्या को एक ऐसी सुरक्षित और समृद्ध नगरी के रूप में चित्रित किया है जहाँ सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध थे।

✨ विशेष तथ्य : प्राचीन भारत में नगरों की सुरक्षा के लिए तीन प्रकार की खाइयाँ होती थीं – जलपरिखा (पानी से भरी), स्थलपरिखा (सूखी) और अग्निपरिखा (आग से युक्त)। यहाँ “गम्भीरपरिखा” से जलपरिखा का संकेत मिलता है।

🕉️ आध्यात्मिक संदेश

यह श्लोक हमें सिखाता है कि जीवन में सुरक्षा और आत्मनिर्भरता आवश्यक है। गहरी खाई हमारी सीमाओं (मर्यादाओं) का प्रतीक है – हमें अपने आचरण की सीमाएँ निर्धारित करनी चाहिए जो बुराइयों को प्रवेश न करने दें। पशुधन हमारे गुणों और संसाधनों का प्रतिनिधित्व करते हैं – हमें अपने ज्ञान, बल और धन को सजगता से संजोना चाहिए।

॥ परिखा सुरक्षा, पशवः सम्पदा ॥

जय श्री राम 🙏