युद्ध काण्ड अध्याय 115 | 0 श्लोक

राम का वानरों और राक्षसों को विदा करना

राम अपने सहायक वानरों एवं राक्षसों को सम्मानपूर्वक विदा करते हैं, उन्हें उपहार और आशीर्वाद देकर उनके राज्य भेजते हैं। यह युद्धकाण्ड का अंतिम सर्ग है।

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