उत्तर काण्ड अध्याय 35 | 0 श्लोक

गौतम ऋषि द्वारा शक्र (इंद्र) को श्राप

इन्द्र गौतम ऋषि की पत्नी अहल्या के रूप पर मोहित हो जाते हैं और छल से उनके पास जाते हैं। गौतम ऋषि को यह पता चल जाता है और वे क्रोधित होकर इन्द्र को श्राप देते हैं कि उनके शरीर पर हजार योनियाँ (भग) हो जाएँ। बाद में देवताओं की प्रार्थना पर यह श्राप आँखों के रूप में परिवर्तित हो जाता है, जिससे इन्द्र सहस्राक्ष कहलाते हैं।

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