उत्तर काण्ड
अध्याय 10 | 0 श्लोक
रावण की तपस्या और ब्रह्मा से वरदान
रावण ने घोर तपस्या करके ब्रह्मा को प्रसन्न किया और उनसे अमरत्व तथा देवताओं, दानवों, यक्षों आदि से अवध्य होने का वरदान माँगा। ब्रह्मा ने उसे वरदान दे दिया, जिससे वह और अधिक अहंकारी हो गया।
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