सुन्दर काण्ड अध्याय 57 | 0 श्लोक

हनुमान का लंका तट से छलांग लगाना और मैनाक पर्वत का स्पर्श

हनुमान जी लंका जाने के लिए समुद्र तट से विशाल रूप धारण कर छलांग लगाते हैं। बीच समुद्र में मैनाक पर्वत देवताओं की प्रेरणा से प्रकट होता है और उन्हें विश्राम के लिए आमंत्रित करता है। हनुमान उसके आतिथ्य का सम्मान करते हुए उसे स्पर्श करते हैं और बिना विश्राम किए आगे बढ़ जाते हैं। यह सर्ग हनुमान के अडिग संकल्प और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है।