किष्किन्धा काण्ड अध्याय 31 | 0 श्लोक

लक्ष्मण का क्रोध

किष्किन्धाकाण्ड का इकत्तीसवाँ सर्ग लक्ष्मण के प्रचण्ड क्रोध का वर्णन करता है। चार महीने बीत जाने पर भी जब सुग्रीव सीता की खोज के लिए वानर नहीं भेजता और आलस्य तथा भोग-विलास में पड़ा रहता है, तब अधीर होकर लक्ष्मण किष्किन्धा पहुँचते हैं और क्रोध में आकर सुग्रीव को उसकी प्रतिज्ञा का स्मरण दिलाते हैं।

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