किष्किन्धा काण्ड
अध्याय 2 | 0 श्लोक
निर्भय हनुमान्
किष्किन्धाकाण्ड के द्वितीय सर्ग में हनुमान् जी का राम-लक्ष्मण से प्रथम भेंट का वर्णन है। सुग्रीव के भय के कारण हनुमान् ब्राह्मण वेश में राम के पास आते हैं, उनकी सत्य-परीक्षा लेते हैं और अन्त में अपना परिचय देकर सुग्रीव से मैत्री का प्रस्ताव रखते हैं। यह सर्ग हनुमान् के निर्भय स्वभाव और बुद्धि-कौशल को प्रदर्शित करता है।
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