बाल काण्ड
अध्याय 65 | 0 श्लोक
विश्वामित्र का ब्रह्मर्षि बनना
बाल काण्ड का पैंसठवाँ सर्ग विश्वामित्र के कठोर तप के फलस्वरूप ब्रह्मर्षि पद प्राप्त करने का वर्णन करता है। ब्रह्मा जी और देवता उनके तप से प्रसन्न होकर उन्हें ब्रह्मर्षि घोषित करते हैं, और ऋषि वसिष्ठ भी उन्हें ब्रह्मर्षि के रूप में स्वीकार करते हैं। यह सर्ग विश्वामित्र की तपस्या की पराकाष्ठा और उनके अंतिम लक्ष्य की प्राप्ति का सुंदर वर्णन करता है।
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