बाल काण्ड अध्याय 60 | 0 श्लोक

त्रिशंकु स्वर्ग का निर्माण

बाल काण्ड का साठवाँ सर्ग राजा त्रिशंकु की अद्भुत कथा प्रस्तुत करता है। इसमें बताया गया है कि कैसे राजा त्रिशंकु ने सशरीर स्वर्ग जाने की इच्छा से ऋषि वसिष्ठ और उनके पुत्रों से अस्वीकृत होकर महर्षि विश्वामित्र की शरण ली। विश्वामित्र ने अपनी तपोबल से एक पृथक् स्वर्ग का निर्माण किया और त्रिशंकु को उसमें स्थान दिया, जिसे आज आकाश में त्रिशंकु नक्षत्र के रूप में जाना जाता है।