बाल काण्ड
अध्याय 40 | 0 श्लोक
सगर पुत्र और कपिल ऋषि
बाल काण्ड का चालीसवाँ सर्ग सगर के पुत्रों और कपिल ऋषि की कथा का वर्णन करता है। राजा सगर के अश्वमेध यज्ञ के घोड़े को इन्द्र चुरा ले जाते हैं। सगर के साठ हजार पुत्र घोड़े की खोज में पृथ्वी खोदते हुए पाताल पहुँचते हैं, जहाँ कपिल ऋषि समाधि में स्थित हैं और घोड़ा उनके पास बंधा है। क्रोध में आकर वे ऋषि पर आक्रमण करते हैं, जिससे कपिल क्रुद्ध होकर उन्हें भस्म कर देते हैं। बाद में अंशुमान घोड़े को ढूँढ़ने जाते हैं और कपिल से मिलकर अपने पूर्वजों के उद्धार हेतु गंगा के अवतरण का वरदान प्राप्त करते हैं।
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