अयोध्या काण्ड
अध्याय 85 | 0 श्लोक
शूर्पणखा द्वारा रावण को उकसाना
अयोध्याकाण्ड के इस सर्ग में शूर्पणखा, जिसके नाक-कान लक्ष्मण ने काट दिए थे, लंका जाकर रावण से मिलती है और अपने अपमान का बदला लेने के लिए उसे उकसाती है। वह राम की अद्भुत शक्ति और सीता के असीम सौंदर्य का वर्णन करती है, जिससे रावण के मन में सीता हरण की कामना जागृत होती है।
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