अयोध्या काण्ड
अध्याय 114 | 0 श्लोक
कबंध का वध और मुक्ति
यह सर्ग राम-लक्ष्मण की कबंध राक्षस से मुठभेड़ और उसके उद्धार की कथा वर्णित करता है। दंडकारण्य में भ्रमण करते हुए राम और लक्ष्मण का सामना एक भयानक, बिना सिर और गर्दन वाले राक्षस कबंध से होता है, जो उन्हें अपने विशाल बाहों में जकड़ लेता है। राम के कहने पर लक्ष्मण उसकी भुजाएँ काट देते हैं, जिससे कबंध मुक्त होता है और मरने से पूर्व उसे अपने पूर्व जीवन का स्मरण हो जाता है तथा वह राम को शबरी और फिर सुग्रीव से मिलने का मार्गदर्शन देता है।
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