अरण्य काण्ड अध्याय 4 | 0 श्लोक

विराध का शाप और वध

अरण्यकाण्ड के चौथे सर्ग में राम-सीता-लक्ष्मण का दण्डकारण्य में भ्रमण, राक्षस विराध द्वारा सीता का हरण, राम-लक्ष्मण का उससे युद्ध, विराध के वध का प्रयास, अन्ततः उसे गड्ढे में दफनाकर वध, और मरते समय विराध द्वारा अपनी गंधर्व-कथा बताकर राम को शरभंग ऋषि के आश्रम जाने का सुझाव देना वर्णित है।

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