अरण्य काण्ड
अध्याय 34 | 0 श्लोक
शूर्पणखा द्वारा सीता का वर्णन और रावण को उकसाना
अरण्यकाण्ड के चौंतीसवें सर्ग में शूर्पणखा अपने भाई रावण के पास लंका जाती है और उसे अपनी नाक-कान कटने की व्यथा सुनाती है। फिर वह सीता के अलौकिक सौन्दर्य का वर्णन करती है और रावण को उसे हर लाने के लिए उकसाती है। रावण सीता के रूप-माधुरी पर मोहित हो जाता है और उसे प्राप्त करने की योजना बनाने लगता है।
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