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Holi Bhajan

मेरी झोली छोटी पड़ गयी रे इतना दिया मेरी माता (Meri Jhholi Chhoti Pad Gayi Re Itna Diya Meri Mata Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

160 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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माँ का अनुकंपा: मेरी झोली छोटी पड़ गयी रे

इस भक्ति गीत के माध्यम से माँ के असीम अनुग्रह का अनुभव करें और श्रद्धा से इसे गाएं।

मेरी झोली छोटी पड़ गयी रे मेरी झोली छोटी पड़ गयी रे इतना दिया मेरी माता मेरी झोली छोटी पड़ गयी रे इतना दिया मेरी मातामेरी बिगड़ी माँ ने बनायीं सोयी तकदीर जगाईये बात ना सुनी सुनाई मैं खुद बीती बतलाता रे इतना दिया मेरी मातामेरी झोली छोटी पड़ गयी रे इतना दिया मेरी मातामान मिला सम्मान मिला गुणवान मुझे संतान मिलीधन धान मिला नित ध्यान मिला माँ से ही मुझे पहचान मिलीघरबार दिया मुझे माँ ने बेशुमार दिया मुझे माँ नेहर बार दिया मुझे माँ ने जब जब मैं मागने जाता मुझे इतना दिया मेरी मातामेरी झोली छोटी पढ़ गयी रे इतना दिया मेरी माता ...मेरा रोग कटा मेरा कष्ट मिटा हर संकट माँ ने दूर कियाभूले से जो कभी गुरुर किया मेरे अभिमान को चूर कियामेरे अंग संग हुई सहाई भटके को राह दिखाईक्या लीला माँ ने रचाई मैं कुछ भी समझ ना पाता इतना दिया मेरी मातामेरी झोली छोटी पड़ गयी रे इतना दिया मेरी माता ....उपकार करे भव पार करे सपने सब के साकार करेना देर करे माँ मेहर करे भक्तो के सदा भंडार भरेमहिमा निराली माँ की दुनिया है सवाली माँ कीजो लगन लगा ले माँ की मुश्किल में नहीं घबराता रे मुझे इतना दिया मेरी मातामेरी झोली छोटी पढ़ गयी रे इतना दिया मेरी माता ...कर कोई यतन ऐ चंचल मन तूँ होके मगन चल माँ के भवनपा जाये नैयन पावन दर्शन हो जाये सफल फिर ये जीवनतू थाम ले माँ का दामन ना चिंता रहे ना उलझनदिन रात मनन कर सुमिरन जा कर माँ कहलाता मुझे इतना दिया मेरी मातामेरी झोली छोटी पढ़ गयी रे इतना दिया मेरी माता ...

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भक्ति गीत का मूल विषय माँ की अनुकंपा और कृपा को समर्पित है। भक्ति का यह गीत यह बताता है कि कैसे माँ ने अपने भक्त को अनमोल उपहार दिए हैं, जिससे उसकी झोली छोटी पड़ गई है। 'इतना दिया मेरी माता' के शब्द इस भाव को दर्शाते हैं कि माँ की कृपा अपरिमेय है। सब कुछ देने वाली माँ ने बिगड़ी तकदीर को भी संवारने का कार्य किया है, जिससे जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि का आगमन होता है। यहाँ तक कि भक्त अपनी व्यक्तिगत संघर्षों को दूर होता देखता है; 'मेरा रोग कटा मेरा कष्ट मिटा' इस तथ्य को उजागर करता है कि माँ की शक्ति हर संकट को कट कर देती है।

गीत में भक्ति मानवीय भावनाओं का भी चित्रण करता है। भक्त अपनी स्वीकार्यता और माँ की महानता को स्वीकार करते हुए बताता है कि उसकी पहचान माँ ही है। 'घरबार दिया मुझे माँ ने' जैसे वाक्य दर्शाते हैं कि पति, पत्नी, परिवार, और समाज में सम्मान, सुख और महत्त्व प्राप्त करने की प्रेरणा माँ के आशीर्वाद से होती है। यह भक्ति एक मजबूत अध्यात्मिक संबंध को दर्शाती है, जहाँ भक्त अपनी माँ के प्रति गहरी श्रृद्धा और प्रेम से उसे याद करते हैं। जब भक्त कहते हैं, 'मैं खुद बीती बतलाता', तब वो अपने जीवन के उतार-चढ़ाव को दर्शाते हैं और बताते हैं कि कैसे माँ ने उनके जीवन को नया दिशा दिया है।

इस गीत का आध्यात्मिक आयाम भक्ति मार्ग को दर्शाता है। भक्त जब माँ की महिमा को गाते हैं, तो वे सच्ची भक्ति का अनुभव करते हैं। 'जो लगन लगा ले माँ की, मुश्किल में नहीं घबराता' इस भावार्थ में इस बात का संकेत है कि सच्चा भक्त तो हर मुश्किल को मात दे सकता है। यहाँ तक कि भक्त का मनन और सुमिरन उसे आध्यात्मिक जागरूकता की दिशा में बढ़ता है। यह दर्शाता है कि माँ की भक्ति करने से मानव को न केवल मनोबल मिलता है, बल्कि वे संसार के किसी भी संकट से पार हो सकते हैं। यह भक्ति व्यक्ति को उसके स्वरूप का एहसास कराती है और यही उपकार माँ के भक्तों के लिए सबसे बड़ा होता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व हिंदू समाज में माँ के प्रति समर्पण, श्रद्धा, और प्रेम की भावना को दर्शाता है। पुराणों में, विशेषकर देवी भागवत, में माँ का स्थान सर्वोच्च है। मातृत्व का यह संकल्प, भक्तों को ध्यान और साधना के लिए प्रेरित करता है, जिससे कि वे जीवन की बाधाओं का सामना कर सकें। यह भक्ति मीरा बाई, तुलसी दास जैसे भक्तों की परंपरा को आगे बढ़ाती है, जिन्होंने अपनी माँ की महिमा में गीत गाए हैं। यह इस तथ्य को भी पुष्टि करता है कि माँ की कृपा से सभी संकट दूर होते हैं और भक्त को सुख और शांति का अनुभव मिलता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित पाठ मानसिक तनाव को कम करता है, रोगों से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है, और आंतरिक शांति प्रदान करता है। माँ की कृपा में श्रद्धा रखने वाले भक्तों को अपने जीवन में स्थिरता और मानसिक संतुलन प्राप्त होता है। भक्ति के माध्यम से भक्त अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हैं, जिससे जीवन में खुशहाली और समृद्धि का अनुभव होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह या शाम के समय करना सबसे उत्तम होता है। भक्तों को प्रार्थना की व्यवस्था बनानी चाहिए जैसे दीया जलाना, फूल चढ़ाना, और प्रेमपूर्वक ध्यान लगाना। सही मुद्रा में बैठकर गहरी सांस लेकर मन में माँ के प्रति समर्पण की भावना रखकर गाना चाहिए। इससे भक्ति में सच्चाई और भावना की गहराई बढ़ती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का अर्थ क्या है?

यह भजन माँ की अनुकंपा और कृपा को दर्शाता है, जिसमें भक्त बताता है कि माँ ने उसे पर्याप्त आशीर्वाद दिए हैं, जिससे उसकी झोली छोटी पड़ गई है।

भजन का क्‍या महत्व है?

यह भजन मातृत्व, श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है, जो देवी की कृपा को प्रतिबिंबित करता है, और भक्तों को कठिनाइयों से पार होने की प्रेरणा देता है।

इसके पाठ का सही समय क्या है?

भजन का पाठ सुबह सूर्योदय या शाम के समय करना विशेष लाभकारी है, क्योंकि इस समय मन शांति और ध्यान की अवस्था में होता है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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