108 Ramayan Choupai

रामा रामा रटते रटते, बीती रे उमरिया - भजन (Rama Rama Ratate Ratate Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

57 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

रघुकुल नंदन की भक्ति से पूर्ण भजन

यह भजन भगवन् श्रीराम के प्रति प्रेम और श्रद्धा से परिपूर्ण है, इसे गाकर भक्ति का अनुभव करें।

रामा रामा रटते रटते, बीती रे उमरिया - भजन (Rama Rama Ratate Ratate Lyrics in Hindi) - भक्‍तिलोक रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया । रघुकुल नंदन कब आओगे भिलनी की डगरिया ॥ मैं शबरी भिलनी की जाई भजन भाव ना जानु रे । राम तेरे दर्शन के हित वन में जीवन पालूं रे । चरणकमल से निर्मल करदो दासी की झोपड़िया ॥॥ रामा रामा रटते रटते..॥ रोज सवेरे वन में जाकर फल चुन चुन कर लाऊंगी । अपने प्रभु के सन्मुख रख के प्रेम से भोग लगाऊँगी । मीठे मीठे बेरों की मैं भर लाई छबरिया ॥॥ रामा रामा रटते रटते..॥ श्याम सलोनी मोहिनी मूरत नैनो बीच बसाऊंगी । सुबह शाम नित उठकर मै तोतेरा ध्यान लगाऊँगी । पद पंकज की रज धर मस्तक जीवन सफल बनाउंगी । अब क्या प्रभु जी भूल गए हो दासी की डगरिया ॥॥ रामा रामा रटते रटते..॥ नाथ तेरे दर्शन की प्यासी मैं अबला इक नारी हूँ । दर्शन बिन दोऊ नैना तरसें सुनलो बहुत दुखारी हूँ । हरी रूप में दर्शन देदे डालो एक नजरिया ॥॥ रामा रामा रटते रटते..॥ रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया । रघुकुल नंदन कब आओगे भिलनी की डगरिया ॥
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में भक्त की निस्वार्थ भक्ति और श्रीराम के प्रति गहरी आसक्ति का वर्णन किया गया है। भक्त, जो खुद को एक दासी के रूप में प्रस्तुत करता है, श्रद्धा पूर्वक श्रीराम के दर्शन की कामना करता है। यह कहता है 'रघुकुल नंदन कब आओगे', जिसमें भक्त का ध्यान श्रीराम की कृपा की ओर केंद्रित है। श्रीराम की पूजा में उसकी सच्ची भक्ति और श्रद्धा का भाव स्पष्ट होता है, जैसे 'भजन भाव ना जानु रे' – यहाँ भक्त यह स्वीकारता है कि वह भक्ति के गहन अर्थ से अवगत नहीं है किन्तु उसे अपने प्रभु से सच्चा प्रेम है। यह भजन प्रकट करता है कि भगवान को देख पाना कितना महत्वपूर्ण है और भक्त इसका कितनी तड़प के साथ इंतजार कर रहा है।

भजन में 'राम तेरे दर्शन के हित वन में जीवन पालूं रे' जैसी पक्तियाँ भक्त के सरल और निष्कलोच प्रेम को दर्शाती हैं। यहाँ, भक्त संकल्प करता है कि वह भगवान के लिए वन में जाऐगा और फल चुनकर उन्हें भोग के रूप में अर्पित करेगा। यह न केवल भक्ति का कृत्य है, बल्कि यह समर्पण और सच्ची प्रेम भावना का प्रतीक भी है। भावार्थ में यह भी स्पष्ट है कि भक्त की भक्ति केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अपने जीवन में भगवान को हर क्षण में सहायतािका के रूप में देखने का प्रयास कर रहा है। 'दर्शन बिन दोऊ नैना तरसें' पंक्ति के माध्यम से भक्त अपनी व्यथा प्रकट करता है, उसकी चाह होती है कि वह अपने प्रभु के पदकमल की धूल को अपने माथे पर सजे।

इस भजन के माध्यम से भक्ति मार्ग का सही स्वरूप बताया गया है, जहाँ भक्ति केवल कर्मकाण्डों तक सीमित नहीं है बल्कि नियमित ध्यान और प्रेमपूर्ण समर्पण की भी आवश्यकता होती है। 'सुबह शाम नित उठकर मै तोतेरा ध्यान लगाऊँगी' से यह इंगित होता है कि असली भक्ति तो नियमित साधना, ध्यान, और भगवान के प्रति निरंतर श्रद्धा में है। यह भजन भावनात्मक स्तर पर भक्ति के इन पहलुओं को उजागर करते हुए स्पष्ट करता है कि भक्ति का वास्तविक मूल्य भक्त की स्थिति और भगवान के प्रति अनन्य प्रेम में है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन की प्रासंगिकता भारतीय पौराणिक कथाओं में गहराई से निहित है, विशेष रूप से रामायण में। भगवान श्रीराम को रघुकुल नंदन कहा जाता है, जो उनके आदि से अंतिम तक का मूल्य और कर्तव्य की भावना को दर्शाता है। भक्त की उपमाएँ जैसे शबरी और उसकी भक्ति की सच्चाई इस कथा से संदर्भित होती हैं, जहाँ शबरी ने भगवान के प्रति अपार प्रेम और समर्पण दिखाया। ये भजन सुनने से भक्त को रामायण की कथाओं की याद रहती है, जहां भगवान की कृपा और आशीर्वाद की उपलब्धता का अनुभव होता है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। इस भजन का जप करने से मानसिक शांति और आंतरिक सुकून की प्राप्ति होती है। इसे गाने या सुनने से भक्ति का अनुभव कर मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। भक्त अपने कष्टों को भुलाकर प्रभु की अनुकंपा में आत्मविसर्जित हो जाता है, जिससे जीवन में स्थिरता और संतोष आता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप सुबह सूर्योदय के समय या शाम को संध्याकाल के समय करने की सलाह दी जाती है। भक्त को पूजा स्थान पर एक दीपक जलाना चाहिए और भगवान श्रीराम के चित्र के समक्ष भोग का अर्पण करना चाहिए। जप करते समय चित्त को शांत रखना बहुत आवश्यक है, इसी के लिए भक्त ध्यान की मुद्रा में बैठकर भजन का पाठ करे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य भाव क्या है?

इस भजन का मुख्य भाव भगवान श्रीराम के प्रति अनन्य प्रेम और उनके दर्शन की उत्कंठा है। भक्त अपनी सच्ची भक्ति से प्रभु को आकर्षित करने का प्रयास कर रहा है।

भजन में शबरी का उल्लेख क्यों किया गया है?

भजन में शबरी का उल्लेख उसकी भक्तिपूर्ण कथा के अनुसरण में किया गया है, जो भगवान श्रीराम के प्रति अपने प्रेम और श्रद्धा को प्रकट करती है। यह एक प्रेरक उदाहरण है भक्त की निस्वार्थ सेवा का।

क्या इस भजन का जप मानसिक शांति के लिए लाभदायक है?

हाँ, इस भजन का जप मानसिक शांति और आंतरिक संतुलन प्राप्त करने में मदद करता है। यह भक्त को भगवान की कृपा का अनुभव कराता है और मन को प्रसन्नता से भर देता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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