Parvati Stotram

है प्रीत जहाँ की रीत सदा ( Hai Preet Jahan Ki Reet Sada Lyrics in hindi )

195 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

भारत प्रेम का दिव्य गान

इस भजन के माध्यम से हम भारत की ममता और प्रेम का सम्मान करते हैं। इसे गाने से भक्ति की अनुभूति होती है।

है प्रीत जहाँ की रीत सदा ( Hai Preet Jahan Ki Reet Sada Lyrics in hindi ) है प्रीत जहाँ की रीत सदा ( Hai Preet Jahan Ki Reet Sada Lyrics in hindi ) - है प्रीत जहाँ की रीत सदा - लिरिक्स हिंदी में जब ज़ीरो दिया मेरे भारत ने भारत ने मेरे भारत ने दुनिया को तब गिनती आयी तारों की Sprache भारत ने दुनिया को पहले सिखलायी देता ना दशमलव भारत तो यूं चाँद पे जाना मुश्किल था धरती और चाँद की दूरी का अंदाजा लगाना मुश्किल था सभ्यता जहाँ पहले आयी पहले जनमी है जहाँ पे कला अपना भारत वो भारत है जिसके पीछे संसार चला संसार चला और आगे बढ़ा यूं आगे बढ़ा, बढ़ता ही गया भगवान करे ये और बढ़े बढ़ता ही रहे और फूले-फले है प्रीत जहाँ की रीत सदा मैं गीत वहाँ के गाता हूँ भारत का रहने वाला हूँ भारत की बात सुनाता हूँ काले-गोरे का भेद नहीं हर दिल से हमारा नाता है कुछ और न आता हो हमको हमें प्यार निभाना आता है जिसे मान चुकी सारी दुनिया मैं बात वो ही दोहराता हूँ भारत का रहने... जीते हो किसी ने देश तो क्या हमने तो दिलों को जीता है जहाँ राम अभी तक है नर में नारी में अभी तक सीता है इतने पावन हैं लोग जहाँ मैं नित-नित शीश झुकाता हूँ भारत का रहने इतनी ममता नदियों को भी जहाँ माता कह के बुलाते है इतना आदर इन्सान तो क्या पत्थर भी पूजे जातें है इस धरती पे मैंने जनम लिया ये सोचये सोच के मैं इतराता हूं भारत का रहने वाला हूं भारत की बात सुनाता हूं है प्रीत जहाँ की रीत सदा हो... हो... हो...
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय प्रेम और एकता है, जो भारत की सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाता है। कवी यहाँ यह कहते हैं कि 'है प्रीत जहाँ की रीत सदा', जिसमें वे यह संकेत कर रहे हैं कि प्रेम और स्नेह की भावना हमेशा से हमारे समाज का आधार रही है। वे यह बताने का प्रयास कर रहे हैं कि उनके देश ने पहले ही दुनिया को ज्ञान जैसे जीरो और दशमलव की अवधारणा दी है, जिससे विज्ञान और सभ्यता का विकास संभव हुआ। जब वे यह कहते हैं कि 'भारत का रहने वाला हूँ, भारत की बात सुनाता हूँ', तो यह उनका गर्व और अपने देश के प्रति उनकी श्रद्धा को दर्शाता है। यहाँ असमानता को दरकिनार करते हुए, सभी जातियों, रंगों, और वर्गों से ऊपर उठकर प्रेम की बात की जा रही है।

प्रेम की जब बात होती है, तो यह न केवल भौतिक प्रेम की ओर इशारा करता है, बल्कि यह आध्यात्मिक प्रेम का भी बोध कराता है। 'जीते हो किसी ने देश तो क्या, हमने तो दिलों को जीता है' इस पंक्ति में ध्यान में आता है कि सच्चा प्रेम केवल भौतिक सीमा तक नहीं सिमटता, बल्कि यह मानवता के दिलों में बसने की कला है। कवि का यह संदेश है कि वास्तविक विजय वही है जब हम एक-दूसरे के दिलों को जीतते हैं। यह गीत इंसानियत के प्रति उदारता, सहिष्णुता और ममता की भावना को भी दर्शाता है, जिससे समाज का उत्थान संभव है।

भक्ति मार्ग का यह एक अद्भुत स्वरूप है, जहाँ पर प्रेम और भक्ति का अद्वितीय मेल देखने को मिलता है। यहाँ यह सिखाया जा रहा है कि वास्तविक पूजा सिर्फ मूर्तियों की नहीं, बल्कि मानवता की की जाती है। 'इतनी ममता नदियों को भी जहाँ माता कह के बुलाते हैं', यह भाव उस प्रेम का परिचायक है जो हमारे समाज में परिवार के प्रति होता है। इस भजन में न केवल संस्कृति बल्कि अंत:करण की उन भावना को भी उजागर किया गया है, जो हमें एकता और प्रेम के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय संस्कृति, इतिहास और रमणीयता का प्रतीक है। प्राचीन हिंदू ग्रंथों में बार-बार प्रेम, एकता और मानवता के मूल सिद्धांतों को महत्व दिया गया है। महाभारत और रामायण में प्रेम के अनेक उदाहरण मिलते हैं, जहाँ राम और सीता का प्रेम, और द्रोणाचार्य और कर्ण जैसे पात्रों के बीच की भावुकता को दर्शाया गया है। इस भजन में उक्त सभी अनुभवों का सार प्रस्तुत किया गया है, जो भारत की महान धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित पाठ मानसिक शांति, भावनात्मक सुकून और आत्मिक प्रसन्नता का अनुभव कराता है। भक्ति रस में लिप्त होने पर मन की द्वंद्वता समाप्त होती है और एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। भजन का जाप करते समय मन में सच्चे प्रेम की भावना उपजती है, जो आस-पास के वातावरण में भी सकारात्मकता फैलाती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन का पाठ सुबह सूर्योदय के समय या संध्या समय किया जा सकता है। इसे करने के लिए एक स्वच्छ स्थान चुनें, जहाँ आप शांति से बैठ सकें। एक दीप जलाना और कुछ पुष्प अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। सच्चे मन से ध्यान और प्रेम के साथ भजन का गान करें, जिससे आपकी भक्ति की भावना और अधिक गहरी हो सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन किस तत्व पर आधारित है?

यह भजन प्रेम और मानवता के बारे में है, जो भारतीय संस्कृति का आधार है। इसे गाने से हम एकता और समानता की भावना को जीवित रखते हैं।

क्या इस भजन का धार्मिक महत्व है?

हां, इस भजन का धार्मिक महत्व है क्योंकि यह हमारे पूर्वजों द्वारा स्थापित मूल्यों को याद दिलाता है और भक्ति मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

इस भजन का प्रभाव क्या है?

इस भजन का नियमित जाप मानसिक शांति, खुशी, और व्यक्तिगत विकास में सहायता करता है। यह प्रेम और एकता की भावना को फैलाने में भी मददगार होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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