Parvati Stotram

श्री हरि विष्णु चालीसा लिरिक्स हिंदी (Shri Vishnu Chalisa Lyrics in Hindi) - Vishnu Chalisha - BhaktiLok

60 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

Vishnu Chalisha - BhaktiLok


वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें।

।।दोहा।।

विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय ।
कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय ॥

।।चौपाई।।

नमो विष्णु भगवान खरारी
कष्ट नशावन अखिल बिहारी ।
प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी
त्रिभुवन फैल रही उजियारी ॥
सुन्दर रूप मनोहर सूरत
सरल स्वभाव मोहनी मूरत ।
तन पर पीताम्बर अति सोहत
बैजन्ती माला मन मोहत ॥
शंख चक्र कर गदा विराजे
देखत दैत्य असुर दल भाजे ।
सत्य धर्म मद लोभ न गाजे
काम क्रोध मद लोभ न छाजे ॥
सन्तभक्त सज्जन मनरंजन
दनुज असुर दुष्टन दल गंजन ।
सुख उपजाय कष्ट सब भंजन
दोष मिटाय करत जन सज्जन ॥
पाप काट भव सिन्धु उतारण
कष्ट नाशकर भक्त उबारण ।
करत अनेक रूप प्रभु धारण
केवल आप भक्ति के कारण 
धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा
तब तुम रूप राम का धारा ।
भार उतार असुर दल मारा
रावण आदिक को संहारा ॥
आप वाराह रूप बनाया
हिरण्याक्ष को मार गिराया ।
धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया
चौदह रतनन को निकलाया ॥
अमिलख असुरन द्वन्द मचाया
रूप मोहनी आप दिखाया ।
देवन को अमृत पान कराया
असुरन को छवि से बहलाया ॥
कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया
मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया ।
शंकर का तुम फन्द छुड़ाया
भस्मासुर को रूप दिखाया ॥
वेदन को जब असुर डुबाया
कर प्रबन्ध उन्हें ढुढवाया ।
मोहित बनकर खलहि नचाया
उसही कर से भस्म कराया ॥
असुर जलन्धर अति बलदाई
शंकर से उन कीन्ह लड़ाई ।
हार पार शिव सकल बनाई
कीन सती से छल खल जाई ॥
सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी
बतलाई सब विपत कहानी ।
तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी
वृन्दा की सब सुरति भुलानी ॥
देखत तीन दनुज शैतानी
वृन्दा आय तुम्हें लपटानी ।
हो स्पर्श धर्म क्षति मानी
हना असुर उर शिव शैतानी ॥
तुमने ध्रुव प्रहलाद उबारे
हिरणाकुश आदिक खल मारे ।
गणिका और अजामिल तारे
बहुत भक्त भव सिन्धु उतारे ॥
हरहु सकल संताप हमारे
कृपा करहु हरि सिरजन हारे ।
देखहुं मैं निज दरश तुम्हारे
दीन बन्धु भक्तन हितकारे ॥
चाहता आपका सेवक दर्शन
करहु दया अपनी मधुसूदन ।
जानूं नहीं योग्य जब पूजन
होय यज्ञ स्तुति अनुमोदन ॥
शीलदया सन्तोष सुलक्षण
विदित नहीं व्रतबोध विलक्षण ।
करहुं आपका किस विधि पूजन
कुमति विलोक होत दुख भीषण ॥
करहुं प्रणाम कौन विधिसुमिरण
कौन भांति मैं करहु समर्पण ।
सुर मुनि करत सदा सेवकाई
हर्षित रहत परम गति पाई ॥
दीन दुखिन पर सदा सहाई
निज जन जान लेव अपनाई ।
पाप दोष संताप नशाओ
भव बन्धन से मुक्त कराओ ॥
सुत सम्पति दे सुख उपजाओ
निज चरनन का दास बनाओ ।
निगम सदा ये विनय सुनावै
पढ़ै सुनै सो जन सुख पावै ॥


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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

संकटमोचन हनुमान जी का यह भजन "श्री हरि विष्णु चालीसा लिरिक्स हिंदी (Shri Vishnu Chalisa Lyrics in Hindi) - Vishnu Chalisha - BhaktiLok" बल, बुद्धि, विद्या और भक्ति का संचार करने वाला है। कलयुग के जागृत देव श्री हनुमान जी की महिमा अपार है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य साधक के भीतर के भय को दूर कर उसमें आत्मगौरव और निष्काम सेवा भाव जागृत करना है।

भजन की चौपाइयों और पंक्तियों में हनुमान जी की लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना और प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम का वर्णन होता है। हनुमान जी की शरण में जाने पर बड़े से बड़ा संकट भी क्षण भर में समाप्त हो जाता है, यही इस भजन की मूल भावना है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की भांति ही हनुमान भजनों का विशेष धार्मिक महत्त्व है। हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस पावन भजन के गायन से भूत-पिशाच, नकारात्मक ऊर्जा और सभी प्रकार के ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान भजन से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, मानसिक रोग जैसे तनाव, अनिद्रा और डिप्रेशन दूर होते हैं। यह छात्रों की बुद्धि और परीक्षा में सफलता के लिए भी रामबाण है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष रूप से निर्धारित है। लाल आसन पर बैठकर, हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाएं और पूरे मनोयोग से इस भजन का संकीर्तन करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हनुमान जी को किस दिन चमेली का तेल चढ़ाना चाहिए?

शनिवार और मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर चढ़ाना अत्यंत शुभ और संकट निवारक माना गया है।

क्या हनुमान भजन परीक्षा के भय को दूर करने में सहायक है?

हाँ, हनुमान जी के भजनों और मंत्रों के संकीर्तन से मन एकाग्र होता है, भय का नाश होता है और याददाश्त बढ़ती है।

शनि दोषों की शांति के लिए हनुमान उपासना क्यों की जाती है?

हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था, जिसके कारण शनिदेव ने वचन दिया था कि जो हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि जनित पीड़ा नहीं भोगनी पड़ेगी।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 17 Sep 2026

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