Parvati Stotram

क्यों रूठा मेरा श्याम | Heart Touching Sad Shyam Bhajan | Kyu Rootha Mera Shyam| Sukhjeet Singh Toni - BhaktiLok

70 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

"क्यों रूठा मेरा श्याम" भजन भक्ति रस की उस पराकाष्ठा का प्रतीक है जहाँ भक्त अपने आराध्य के प्रति विरह और समर्पण की भावना को व्यक्त करता है। सुखजीत सिंह टोनी द्वारा स्वरबद्ध यह हृदयस्पर्शी भजन कलयुग के उन साधकों के लिए एक संजीवनी है, जो ईश्वर से दूर होने की पीड़ा का अनुभव करते हैं। सनातन धर्म में 'विरह भक्ति' को प्रेम का सर्वोच्च सोपान माना गया है, जहाँ भक्त अपने श्याम से प्रश्न करता है कि उसकी भक्ति में क्या कमी रह गई कि प्रभु उससे रूठ गए हैं। यह भजन न केवल एक संगीत रचना है, बल्कि यह जीवात्मा की परमात्मा से मिलन की तड़प और अनन्य शरणागति का जीवंत दस्तावेज है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

क्यों रूठा मेरा श्याम, क्या कमी रह गई मेरी भक्ति में?
क्यों रूठा मेरा श्याम, क्या कमी रह गई मेरी भक्ति में?
आँखों में आंसू हैं, और नाम है तेरा मेरी हर एक सिसकी में..
क्यों रूठा मेरा श्याम...

मैंने तो अपना सब कुछ तुझपे ही वार दिया,
तेरी चौखट पे आकर, अपना संसार हार दिया।
अब तो दया कर दे, क्यों तड़पाता है मुझे इस बेबसी में?
क्यों रूठा मेरा श्याम...

लोग कहते हैं तू सबका सहारा है,
फिर क्यों मेरा ही दामन किनारों से हारा है?
क्या मेरा प्रेम कम है, या तू खो गया है मेरी ही मस्ती में?
क्यों रूठा मेरा श्याम...

आजा ओ सांवरे, अब और न सता मुझे,
अपनी शरण में ले ले, अपना बना मुझे।
तेरी ही प्रतीक्षा है, मेरी हर एक धड़कन की बस्ती में..
क्यों रूठा मेरा श्याम, क्या कमी रह गई मेरी भक्ति में?

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा है। भक्त यहाँ अपने आराध्य श्री कृष्ण से प्रश्न कर रहा है कि हे प्रभु! यदि आप अंतर्यामी हैं, तो आपको मेरी पीड़ा का आभास क्यों नहीं हो रहा? 'क्यों रूठा मेरा श्याम' का अर्थ केवल शिकायत नहीं, बल्कि एक भक्त की वह व्याकुलता है जो अपने इष्ट को अपने समीप देखना चाहता है। जब भक्त कहता है कि 'क्या कमी रह गई मेरी भक्ति में', तो वह वास्तव में अपने अहंकार का त्याग कर रहा होता है। वह अपनी साधना की समीक्षा कर रहा है। यह भजन सिखाता है कि भक्ति में जब तक 'विरह' न हो, तब तक 'मिलन' का आनंद प्राप्त नहीं होता। यह भजन साधक को यह संदेश देता है कि ईश्वर से रूठना या उन्हें मनाना वास्तव में स्वयं के भीतर झांकने की प्रक्रिया है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • विरह भक्ति: यह भजन राधा-कृष्ण की विरह परंपरा को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करता है।
  • आत्म-समर्पण: भजन का मुख्य संदेश 'सब कुछ वार देने' का भाव है, जो पूर्ण शरणागति को दर्शाता है।
  • भावुकता: यह भजन उन लोगों के लिए विशेष है जो जीवन के कठिन दौर में प्रभु का साथ ढूंढ रहे हैं।
  • सांत्वना: यह सुनने वाले के मन को शांत करता है और ईश्वर के प्रति विश्वास को दृढ़ बनाता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को एकांत में, संध्या के समय या जब मन अशांत हो, तब सुनना अत्यंत फलदायी होता है। इसे गाते समय दीपक प्रज्वलित कर श्री कृष्ण के विग्रह के समक्ष बैठना चाहिए। यह भजन सत्संग, एकादशी व्रत, या जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भी गाया जा सकता है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

सुखजीत सिंह टोनी द्वारा प्रस्तुत यह भजन अपनी सादगी और मार्मिकता के लिए जाना जाता है। यह भजन पारंपरिक 'श्याम भजन' शैली में रचा गया है, जिसमें ब्रज की भक्ति परंपरा का पुट है। इसकी धुन में करुणा और प्रेम का अद्भुत मिश्रण है, जो श्रोता को सीधे प्रभु के चरणों से जोड़ता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द सरल अर्थ संदर्भ
श्याम श्री कृष्ण आराध्य देव
विरह बिछड़ने का दुःख भक्ति की पराकाष्ठा
शरणागति पूर्ण समर्पण ईश्वर के प्रति पूर्ण विश्वास
सिसकी रोने की आवाज हृदय की पीड़ा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: यह भजन किस देवता को समर्पित है?

उत्तर: यह भजन भगवान श्री कृष्ण (श्याम) को समर्पित है।

प्रश्न 2: क्या इस भजन को सुनने से मन की शांति मिलती है?

उत्तर: हाँ, यह भजन भक्ति रस से परिपूर्ण है और मन को एकाग्र करने में सहायक है।

प्रश्न 3: सुखजीत सिंह टोनी कौन हैं?

उत्तर: सुखजीत सिंह टोनी एक प्रसिद्ध भजन गायक हैं जो अपनी भावपूर्ण गायकी के लिए जाने जाते हैं।

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

यह सामग्री पारंपरिक भक्ति साहित्य, संकीर्तन परंपराओं और उपलब्ध भजन संकलनों के आधार पर तैयार की गई है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!