Parvati Stotram

भजन - सजा दो घर को गुलशन सा मेरे सरकार आये है लिरिक्स इन हिंदी - भक्ति लोक

72 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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कंट्रास्ट:
Krishna Stotram भजन लिरिक्स भक्ति लोक

सजा दो घर को गुलशन सा मेरे सरकार आये है लिरिक्स इन हिंदी - सजा दो घर को गुलशन सा भजन

प्रस्तुति: भक्ति लोक (Bhaktilok.in) | संकलित एवं संपादित पाठ

सनातन धर्म की पावन परंपरा में संकीर्तन और प्रभु चरणों में अनन्य समर्पण को कलियुग का सबसे सरल और परम साधन माना गया है। जब भी भक्त के जीवन में निराशा के बादल छंटते हैं और करुणा बरसने लगती है, तब अंतरात्मा से एक ही स्वर गूंज उठता है—"सजा दो घर को गुलशन सा मेरे सरकार आये हैं।" यह अत्यंत ही लोकप्रिय, भावपूर्ण और कर्णप्रिय भजन आराध्य देव भगवान श्री कृष्ण, मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम या फिर किसी भी प्रिय इष्ट के आगमन की उस अलौकिक खुशी का जीवंत चित्रण है, जिसके लिए एक साधक वर्षों तक प्रतीक्षा करता है। इस भजन की लय, इसका प्रत्येक शब्द और इसका अंतर्मन को झकझोर देने वाला भाव भक्तों की आंखें आनंद के अश्रु से नम कर देता है। जब साधक अपने घर-द्वार को स्वच्छ कर, दीप जलाकर और हृदय में प्रेम का आसन बिछाकर अपने प्रभु की अगवानी की तैयारी करता है, तो सांसारिक दुखों का स्वतः नाश हो जाता है। श्री हनुमान चालीसा के पाठ की भांति ही यह संकीर्तन घर के वातावरण को पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा से ओत-प्रोत कर देता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के संपूर्ण बोल, इसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ, गायन की विधि और जीवन पर पड़ने वाले इसके सकारात्मक प्रभावों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ स्थायी / मुखड़ा ॥

सजा दो घर को गुलशन सा, मेरे सरकार आये हैं,
लगा दो गले से ऐ मेरे यारों, मेरे सरकार आये हैं!
मेरे सरकार आये हैं, मेरे भोले (या कृष्ण) सरकार आये हैं,
सजा दो घर को गुलशन सा, मेरे सरकार आये हैं।


॥ प्रथम अंतरा ॥

नित्तियों से सजाओ आंगन, हर कोना महकाओ,
खुशियों के दीप जलाओ, सब मिलकर गीत गाओ!
उमंगें दिल में छाई हैं, बहारें बन के छाई हैं,
सजा दो घर को गुलशन सा, मेरे सरकार आये हैं।


॥ द्वितीय अंतरा ॥

छम-छम पाँव में घुंघरू, दिलों में प्यार की मस्ती,
खुशी से झूम उठी देखो, ये सारी देव बस्ती!
वो देखो दूर से मेरे, कन्हैया (या राम जी) पास आये हैं,
सजा दो घर को गुलशन सा, मेरे सरकार आये हैं।


॥ तृतीय अंतरा ॥

चरण धो धो के मैं पिउंगी, अपने हाथों से सजाऊंगी,
नज़र उतारूँ मैं उनकी, उन्हें सीने से लगाऊंगी!
मेरी किस्मत की रेखाएं, चमकने आज आई हैं,
सजा दो घर को गुलशन सा, मेरे सरकार आये हैं।


॥ समापन चरण ॥

भजन गाऊं सुनावूं मैं, करूँ पलकों से आरती,
मिटी हर एक मुश्किल है, बुझी हर एक आपति!
'भक्ति लोक' के भक्तों की, सुनी भगवान ने ऐसी,
सजा दो घर को गुलशन सा, मेरे सरकार आये हैं,
लगा दो गले से ऐ मेरे यारों, मेरे सरकार आये हैं!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल कुछ शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह एक जीवात्मा की परमात्मा के प्रति अगाध निष्ठा और प्रेम की पराकाष्ठा है। जब एक भक्त कहता है कि "सजा दो घर को गुलशन सा, मेरे सरकार आये हैं," तो इसका तात्पर्य यह है कि हमारा शरीर और हमारा अंतर्मन ही हमारा वास्तविक घर है। जब तक इसमें सांसारिक मोह-माया और अहंकार का कचरा भरा रहता है, तब तक ईश्वर का वास वहां नहीं हो सकता। इस भजन के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि साधना और भक्ति के जल से जब मन रूपी घर को पवित्र कर दिया जाता है, तब भगवान रूपी सरकार (स्वामी) सहज ही वहां पधारते हैं।

तीसरे अंतरे की पंक्तियाँ—"चरण धो धो के मैं पिउंगी, अपने हाथों से सजाऊंगी"—शबरी और मीरा बाई के उस अनन्य प्रेम की याद दिलाती हैं जहाँ भक्त अपने अहंकार को पूर्णतः मिटाकर अपने इष्ट के चरणों की धूल को अपने जीवन का सर्वस्व मान लेता है। यह भजन साधक को सिखाता है कि भगवान किसी भव्य महलों में नहीं, बल्कि सच्चे और प्रेम से भरे हुए निर्मल हृदय में निवास करते हैं। इसी प्रकार के अन्य पावन पदों के लिए आप ओम जय जगदीश हरे आरती का भी स्मरण कर सकते हैं जो संध्या समय घर-घर में गायी जाती है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • आनंद और उल्लास का प्रतीक: यह भजन साधक के भीतर विषाद और निराशा को दूर कर परमानंद और उत्साह का संचार करता है।
  • शरणागति का भाव: इसमें भक्त अपनी संपूर्ण झोली अपने आराध्य के चरणों में समर्पित कर देता है।
  • सामूहिक संकीर्तन: पारिवारिक आयोजनों, उत्सवों, और विशेषकर दीपावली या श्री कृष्ण जन्मोत्सव पर इस भजन को गाने से घर का वातावरण ऊर्जावान हो जाता है।
  • मानसिक शांति: तनावपूर्ण जीवनशैली में इस प्रकार के भजनों का श्रवण करने से मन को असीम शांति और स्थिरता मिलती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस दिव्य भजन को गाने और सुनने के लिए किसी कठोर नियमों की आवश्यकता नहीं होती, परंतु यदि इसे निम्नलिखित अवसरों और विधियों के अनुसार किया जाए तो इसका फल कई गुना बढ़ जाता है:

  1. ब्रह्म मुहूर्त या संध्या बेदी: सुबह स्नान के पश्चात पूजा घर में दीप प्रज्वलित करते समय या संध्या आरती के तुरंत बाद इसे गुनगुनाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  2. विशेष उत्सव: दीपावली, श्री कृष्ण जन्माष्टमी, रामनवमी या घर में किसी नए मेहमान या मांगलिक कार्य के आगमन पर।
  3. सत्संग और कीर्तन मंडली: साप्ताहिक सत्संग या पारिवारिक अनुष्ठानों में मृदंग, ढोलक और मंजीरों के साथ सामूहिक गायन।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से जगत के पालनहार भगवान श्री कृष्ण, मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम तथा सनातन धर्म के सभी स्वरूपों को समर्पित है। संकीर्तन परंपरा हमारे देश के महान संतों जैसे श्री चैतन्य महाप्रभु, सूरदास, मीराबाई और तुलसीदास जी की दी हुई वह अमूल्य धरोहर है, जिन्होंने संगीत के माध्यम से आम जनमानस को ईश्वर से जोड़ने का कार्य किया। जब हम अपने आराध्य को 'सरकार' कहकर संबोधित करते हैं, तो यह उनके प्रति असीम आदर, राजाधिराज स्वरूप और परम पालक होने के भाव को प्रकट करता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की रचना अत्यंत सरल, सुबोध और लोक-सुलभ हिंदी/अवधी मिश्रित ब्रजभाषा के प्रभाव वाली शब्दावली में की गई है। इसमें प्रयुक्त रूपक जैसे "घर को गुलशन सा सजाना" मन की निर्मलता को दर्शाता है। तुकबंदी और लयबद्धता इतनी सटीक है कि कोई भी बाल वृद्ध इसे सरलता से याद कर सकता है और कीर्तन में आनंदित हो सकता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
गुलशन सा बाग या फूलों के बगीचे जैसा सुंदर भक्ति और पवित्रता से महकता हुआ अंतर्मन
सरकार स्वामी, राजा या आराध्य देवता समस्त संसार के संचालक भगवान श्री हरि
नित्तियों रंगोली, फूल या सजावट की सामग्री मन के सुंदर और सात्विक संस्कार
आपति संकट या विपत्ति जीवन के सभी प्रकार के कष्ट और बाधाएं

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विषय विवरण
भजन का नाम सजा दो घर को गुलशन सा मेरे सरकार आये हैं
मुख्य आराध्य भगवान श्री कृष्ण / श्री राम / सभी इष्ट देव
भाषा सरल हिंदी / लोक भाषा
संगीत शैली भक्ति रस, संकीर्तन, बधाई गीत
मुख्य भाव प्रेम, उत्सव, उल्लास और शरणागति
उपयुक्त अवसर दीपावली, जन्मोत्सव, सत्संग, दैनिक पूजा
प्लेटफॉर्म भक्ति लोक (Bhaktilok.in)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन मुख्य रूप से भगवान श्री कृष्ण और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के आगमन और स्वागत के प्रसंग में गाया जाता है। हालांकि, भक्त इसे अपने इष्ट देव के अनुसार गाते हैं।

इस भजन को सुबह पूजा के समय, संध्या आरती के वक्त, या किसी भी मांगलिक उत्सव और सत्संग के दौरान पूरे परिवार के साथ गाया जा सकता है।

हाँ, भक्ति में भाव सबसे महत्वपूर्ण है। आप इसे केवल ताली बजाकर या बिना किसी वाद्य यंत्र के भी पूरी तल्लीनता के साथ गा सकते हैं।

जब हम ईश्वर के गुणों और उनके आगमन के उल्लास का गान करते हैं, तो हमारा मस्तिष्क सांसारिक चिंताओं से हटकर सकारात्मक ऊर्जा और आनंद में लीन हो जाता है, जिससे मानसिक तनाव कम होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह पृष्ठ सनातन भक्ति परंपरा, लोक संकीर्तन और शास्त्रीय भावनाओं के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध लिरिक्स, प्रामाणिक भावार्थ और आध्यात्मिक प्रेरणा प्रदान करना है।


स्रोत एवं संदर्भ

  • - पारंपरिक सनातन संकीर्तन एवं लोक भजन परंपरा
  • - श्रीमद्भगवद्गीता एवं भक्ति ग्रंथ संदर्भ
  • - भक्ति लोक (Bhaktilok.in) संपादकीय संग्रह

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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