राम द्वारा अंगद, जाम्बवान् आदि का सम्मान
राम अंगद, जाम्बवान्, नल, नील और अन्य प्रमुख वानर योद्धाओं का सम्मान करते हैं और उनके योगदान की सराहना करते हैं।
विवरण
राम ने सुग्रीव, विभीषण और हनुमान का विशेष सम्मान करने के बाद अब अन्य प्रमुख वानर योद्धाओं की ओर ध्यान दिया। उन्होंने अंगद को बुलाया, जो वाली के पुत्र थे और जिन्होंने दूत के रूप में रावण के दरबार में जाकर साहस दिखाया था। जाम्बवान्, जो वानरों के सबसे वृद्ध और बुद्धिमान थे, को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया। नल और नील, जिन्होंने सेतु निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, को भी उपहार दिए गए। इसके अलावा, गज, घोर, मैन्द, द्विविद आदि अन्य वीरों को भी उनके पराक्रम के अनुसार सम्मानित किया गया। यह सर्ग राम की उदारता और प्रत्येक योद्धा के योगदान को स्वीकार करने की भावना को प्रदर्शित करता है।
📖 श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण – युद्धकाण्ड – सर्ग ९८
(राम द्वारा अंगद, जाम्बवान् आदि का सम्मान)
🔆 प्रस्तावना : प्रमुख सहयोगियों के बाद राम ने अन्य वानर वीरों को भी सम्मानित किया। इस सर्ग में अंगद, जाम्बवान्, नल-नील आदि का सत्कार वर्णित है।
🦁 अंगद – वालीनन्दन का सत्कार (श्लोक १-१०)
आहूय परया प्रीत्या परिष्वज्येदमब्रवीत् ॥
अङ्गद त्वं महाबाहो वालिपुत्र पराक्रमी ।
त्वया दूत्यं कृतं वीर रावणस्य सभागतः ॥
सीतायाश्च परिज्ञानं त्वयैव सुकृतं महत् ।
युद्धे च विविधा वीरा निहतास्त्वत्पराक्रमात् ॥
प्रणम्य शिरसा रामं स्थितः प्राञ्जलिरग्रतः ॥
रामोऽपि तं समाश्लिष्य पुनः पुनरुदैक्षत ।
प्रीतिपूर्वं च वाक्यानि व्याजहार महायशाः ॥
त्वं राज्यं कुरु वत्साद्य सुग्रीवानुमतः सदा ।
मम स्नेहाच्च ते राज्यं भविष्यति न संशयः ॥
🐻 जाम्बवान् – ज्ञानवृद्ध का सत्कार (श्लोक ११-२०)
अभिगम्य महातेजाः प्रणम्येदमुवाच ह ॥
त्वया जाम्बवन् धर्मज्ञ बुद्ध्या च परया युता ।
हनूमान् बोधितः सम्यक् स्वबलं च प्रदर्शितम् ॥
युद्धे च साह्यकरणात् कृतं कार्यं महात्मना ।
त्वदुपदेशतः सर्वं सिद्धिमाप्तमनुत्तमाम् ॥
प्रणम्य शिरसा रामं स्थितः प्राञ्जलिरग्रतः ॥
रामोऽपि तं समाश्लिष्य ददौ वस्त्राणि भूषणम् ।
यथार्हं च महाबाहुः पूजयामास धर्मवित् ॥
जाम्बवान् प्रीतिमान् भूत्वा रामचन्द्रमपूजयत् ।
आशीर्भिश्च समस्ताभिर्वर्धयामास राघवम् ॥
🛠️ नल-नील एवं अन्य वीरों का सत्कार (श्लोक २१-३०)
आहूय परया प्रीत्या वाक्यमेतदुवाच ह ॥
युवाभ्यां सेतुबन्धश्च कृतो येन महोदधौ ।
तेन वानरसेनायाः पारमापादितं महत् ॥
युद्धे च विविधाः शूरा निहताश्च पराक्रमैः ।
तस्मात्प्रीतोऽस्मि वां वीरौ वरं दास्यामि वाञ्छितम् ॥
अन्यांश्च वानरवीरान् परिष्वज्य महामतिः ॥
ददौ तेभ्यो यथाशक्ति वासांसि विविधानि च ।
आभूषणानि मुख्यानि मणिरत्नानि भूरिशः ॥
ते सर्वे हृष्टमनसो रामं सत्यपराक्रमम् ।
प्रशशंसुर्महात्मानं प्रणेमुश्च मुदान्विताः ॥
🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं विशेष महत्त्व
🤝 समान भाव से सम्मान
राम ने अंगद, जाम्बवान्, नल-नील और अन्य सभी वानरों को उनके योगदान के अनुसार सम्मान दिया। यह दर्शाता है कि राम के लिए सभी सहयोगी समान रूप से महत्वपूर्ण थे।