भरत का हर्ष और नंदिग्राम के लिए प्रस्थान
भरत हनुमान के साथ नन्दिग्राम से राम से मिलने के लिए प्रस्थान करते हैं और रास्ते में वे भव्य स्वागत की तैयारी करते हैं।
विवरण
भरत ने हनुमान से समाचार सुनकर तुरन्त शत्रुघ्न को बुलाया और पूरी नगरी को राम के स्वागत के लिए सजाने का आदेश दिया। वे स्वयं रथ पर सवार होकर हनुमान के साथ नन्दिग्राम से राम से मिलने चल पड़े। मार्ग में उन्होंने वानरों को देखा और उनका आदर किया। राम के दर्शन की लालसा में वे व्याकुल थे। इस सर्ग में भरत के हर्ष और राम के प्रति उनके अनुराग का सुन्दर वर्णन है।
(भरत का हर्ष और नंदिग्राम के लिए प्रस्थान)
🔆 प्रस्तावना : राम के आगमन की सूचना पाते ही भरत हर्ष से विभोर हो उठते हैं। वे शीघ्र ही राम से मिलने को व्याकुल होकर नन्दिग्राम से प्रस्थान करते हैं। यह सर्ग भरत के प्रेम और उत्सुकता से परिपूर्ण है।
🎉 आनन्द और आदेश (श्लोक १-५)
शत्रुघ्नं सहसा हृष्टः परिष्वज्येदमब्रवीत्॥
श्रुतं ते हनुमद्वाक्यं रामः सम्प्राप्तवान् प्रभुः।
सीतया सह भ्रात्रा च वानरैश्च महाबलैः॥
तूर्णं सज्जीकुरु रथं गच्छामो रघुनन्दनम्।
नगरं चालंकुरुत माल्यदामभिरुत्तमैः॥
🚩 प्रस्थान और मार्ग दर्शन (श्लोक ६-१०)
रथमारुह्य वेगेन प्रययौ हनुमत्सखः॥
ददर्श वानरान् दूरे वृक्षशाखासु संस्थितान्।
कपयः प्लवगाश्चैव सुग्रीवप्रमुखास्तथा॥
तान् दृष्ट्वा हर्षितो भूत्वा भरतः प्राञ्जलिर्बभौ।
हनूमन्तमथोवाच कथयस्व पुनः प्रभोः॥
🛕 राम के दर्शन की लालसा (श्लोक ११-१५)
सीतया सहितं देवं वानरैः परिवारितम्॥
इत्युक्त्वा दर्शयामास भरताय महात्मने।
रामं दृष्ट्वा भरो हर्षात् रथात् तूर्णमवातरत्॥
धावन् प्रहृष्टो वेगेन रामं प्राप्तो महाद्युतिम्।
पादयोः पतितो भूमौ रामः परिषस्वजे तदा॥
🔍 गूढ़ार्थ एवं विशेष महत्त्व
🤝 भ्रातृप्रेम का चरम
भरत राम के दर्शन मात्र से रथ से कूद पड़े, यह भ्रातृप्रेम का उत्कर्ष है।
🙌 वानरों का सम्मान
भरत ने वानरों को देखकर प्रसन्नता व्यक्त की और उनका आदर किया।
🚀 आगामी राज्याभिषेक की ओर
यह मिलन अयोध्या में राम के राज्याभिषेक की पूर्वपीठिका है।
🎊 हनुमान की भूमिका
हनुमान ने दूत के रूप में सफलतापूर्वक दोनों भाइयों को मिलाया।
🎯 शिक्षा : प्रेम और भक्ति ही सबसे बड़ा बल है। भरत के प्रेम ने राम को भी विह्वल कर दिया।