युद्ध काण्ड अध्याय 84

हनुमान् द्वारा भरत को राम के आगमन की सूचना

हनुमान भरत के समीप जाकर उन्हें राम के आगमन की सुखद सूचना देते हैं और भरत आनन्दित हो उठते हैं।

विवरण

हनुमान भरत के पास जाते हैं और उन्हें राम के आने का समाचार सुनाते हैं। भरत अत्यन्त प्रसन्न होते हैं और हनुमान को गले लगा लेते हैं। वे राम के बारे में विस्तार से पूछते हैं – कैसे वे रावण से लड़े, सीता को छुड़ाया, वानरों की सहायता आदि। हनुमान सब कुछ बताते हैं। भरत शीघ्र ही राम से मिलने की तैयारी करते हैं।

(हनुमान् द्वारा भरत को राम के आगमन की सूचना)

ॐ श्री परमात्मने नमः ॥ अथ चतुरशीतितमः सर्गः ॥

🔆 प्रस्तावना : हनुमान भरत के समक्ष उपस्थित होते हैं और उन्हें राम के विजयी आगमन का समाचार देते हैं। भरत का हर्ष देखते ही बनता है।

🗣️ हनुमान का भरत को संबोधन (श्लोक १-५)

॥ श्लोक १-५ ॥
हनूमान् भरतं दृष्ट्वा प्राञ्जलिर्वाक्यमब्रवीत्।
कुशलं ते प्रयच्छामि रामस्यादेशतः प्रभो॥
रामः सुग्रीवसहितः सीतया लक्ष्मणेन च।
वानरैर्बहुभिः सार्धं सम्प्राप्तस्तव सन्निधौ॥
हत्वा रावणमाजौ त्वां द्रष्टुं काङ्क्षति राघवः।
शीघ्रं कुरु प्रियं सौम्य सुहृदां हर्षवर्धनम्॥
📖 भावार्थ : हनुमान ने भरत को देखकर हाथ जोड़े और कहा, "हे प्रभो, मैं आपको राम का संदेश देता हूँ। राम सुग्रीव, सीता, लक्ष्मण और अनेक वानरों के साथ आपके समीप आ पहुँचे हैं। उन्होंने युद्ध में रावण का वध किया और अब आपसे मिलने की इच्छा रखते हैं। हे सौम्य, शीघ्र अपने सुहृदों के हर्ष को बढ़ाने का कार्य करें।" हनुमान के मधुर वचन सुनकर भरत के चेहरे पर खुशी झलक उठी।

🤗 भरत का हर्ष और प्रश्न (श्लोक ६-१०)

॥ श्लोक ६-१० ॥
तच्छ्रुत्वा भरतः प्रीतः हनूमन्तमपूजयत्।
परिष्वज्य च बाहुभ्यां पप्रच्छ कुशलं मुहुः॥
कच्चित्सीता च रामश्च लक्ष्मणश्च महाबलः।
सुग्रीवो वानरैः सार्धं कुशली समराजिरे॥
कच्चिद्रावणमासाद्य विजयं प्राप्तवान् प्रभुः।
कच्चिद्देवाः समाहूता न ते व्यसनमागताः॥
📖 भावार्थ : समाचार सुनकर भरत अत्यन्त प्रसन्न हुए और उन्होंने हनुमान का पूजन किया। दोनों बाहों से गले लगाकर बार-बार कुशलक्षेम पूछा: "क्या सीता, राम और महाबली लक्ष्मण कुशल हैं? सुग्रीव और वानर सब युद्धभूमि में सकुशल हैं? क्या प्रभु ने रावण का सामना करके विजय प्राप्त की? कहीं देवताओं के आहूत होने पर भी कोई संकट तो नहीं आया?" भरत की चिन्ता और प्रेम स्पष्ट है।

📜 हनुमान का उत्तर (श्लोक ११-१५)

॥ श्लोक ११-१५ ॥
हनूमान् प्रत्युवाचेदं शृणु भरत विस्तरात्।
रामेण निहतः संख्ये रावणः सह बान्धवैः॥
सीता चाग्निपरीक्षार्थं प्रविष्टा पावकं शुचिः।
रामेणाङ्गीकृता भूयः पुष्पकेण च सागताः॥
सुग्रीवो हनुमाँश्चैव जाम्बवानङ्गदस्तथा।
सर्व एव महात्मानः कुशलं यान्ति राघवम्॥
इत्युक्त्वा विररामाथ हनूमान् मारुतात्मजः।
भरतः परमप्रीतो हनूमन्तमथाब्रवीत्॥
📖 भावार्थ : हनुमान ने उत्तर दिया: "हे भरत, विस्तार से सुनो। राम ने युद्ध में रावण और उसके सम्बन्धियों को मार डाला। सीता ने अग्निपरीक्षा में प्रवेश करके अपनी पवित्रता सिद्ध की और राम ने उन्हें स्वीकार किया। अब हम पुष्पक विमान से आपके पास आ रहे हैं। सुग्रीव, हनुमान, जाम्बवान, अंगद – सभी महात्मा राम के साथ कुशल हैं।" इतना कहकर हनुमान चुप हो गए। भरत अत्यन्त प्रसन्न हुए और हनुमान से बोले। (आगे भरत की प्रतिक्रिया अगले सर्ग में)

🔍 गूढ़ार्थ एवं विशेष महत्त्व

❤️ भरत की भक्ति

भरत ने सबसे पहले राम, सीता, लक्ष्मण के कुशल की चिन्ता की, यह उनकी अनन्य भक्ति है।

🐵 हनुमान की दूतकला

हनुमान ने संक्षेप में सम्पूर्ण घटनाक्रम बताया, दूत का कर्तव्य निभाया।

🔥 अग्निपरीक्षा का उल्लेख

सीता की अग्निपरीक्षा का उल्लेख कर हनुमान ने उनकी पवित्रता प्रमाणित की।

👑 राज्य का न्याय

भरत ने राज्य राम के लिए सुरक्षित रखा, अब वह सही हाथों में सौंपने को उत्सुक हैं।

🎯 शिक्षा : सच्चा प्रेमी परमात्मा के कल्याण की ही चिन्ता करता है, भरत ने वैसा ही किया।

ॐ तत्सत् – इति वाल्मीकीय रामायणे युद्धकाण्डे चतुरशीतितमः सर्गः ॥
॥ श्रीराम जय राम जय जय राम ॥
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