भरद्वाज ऋषि के आश्रम में आगमन
राम, सीता, लक्ष्मण, सुग्रीव, हनुमान तथा वानर सेना पुष्पक विमान से अयोध्या लौटते समय भरद्वाज ऋषि के आश्रम पर उतरते हैं और उनसे भेंट करते हैं।
विवरण
रावण का वध करके राम ने सीता को मुक्त किया और अयोध्या लौटने का निश्चय किया। विभीषण द्वारा प्रदत्त पुष्पक विमान पर सवार होकर राम, सीता, लक्ष्मण, सुग्रीव, हनुमान, जाम्बवान, अंगद और अन्य वानर प्रमुख अयोध्या के लिए प्रस्थान करते हैं। आकाश मार्ग से जाते हुए वे प्रयाग के समीप भरद्वाज ऋषि के आश्रम को देखते हैं। राम ऋषि के दर्शन की इच्छा से विमान वहाँ उतारने का आदेश देते हैं। ऋषि भरद्वाज राम को देखकर अत्यन्त प्रसन्न होते हैं और उचित आदर-सत्कार करते हैं। वे राम से अयोध्या के समाचार पूछते हैं और राम उन्हें वनवास, सीता हरण, सुग्रीव से मित्रता, वानर सेना द्वारा सेतु निर्माण, रावण वध तथा सीता की अग्निपरीक्षा की संक्षिप्त कथा सुनाते हैं। ऋषि राम की विजय पर हर्ष व्यक्त करते हैं और अयोध्या शीघ्र पहुँचने का आशीर्वाद देते हैं। राम ऋषि से विदा लेकर पुनः विमान पर सवार हो अयोध्या की ओर प्रस्थान करते हैं।
(भरद्वाज ऋषि के आश्रम में आगमन)
🔆 प्रस्तावना : रावणवध के पश्चात राम अयोध्या लौट रहे हैं। मार्ग में वे भरद्वाज ऋषि के आश्रम पर रुकते हैं और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह सर्ग राम की विनम्रता और ऋषियों के प्रति उनके आदर को दर्शाता है।
🚁 पुष्पक विमान से प्रयाग आगमन (श्लोक १-५)
पुष्पकेण विमानेन प्रयाता उत्तरामुखाः॥
गच्छन्तस्ते यदा प्राप्ताः प्रयागं धर्मवत्सलाः।
ददृशुर्भरद्वाजस्य तपोवनमनुत्तमम्॥
तदाश्रमपदं दृष्ट्वा रामः सुग्रीवमब्रवीत्।
अत्र वत्स्यामहे सर्वे मुनिं द्रष्टुं तपोधनम्॥
तथेति सुग्रीववचः श्रुत्वा रामो विमानपः।
अवातरत् सहामात्यैः पुष्पकात् तदनन्तरम्॥
अवतीर्णं तु रामं तं दृष्ट्वा भरद्वाजस्तदा।
सह शिष्यैः समुत्थाय पूजयामास धर्मवित्॥
🙏 ऋषि का सत्कार और राम का वृत्तांत (श्लोक ६-१०)
हनूमन्तं च जाम्बवन्तमङ्गदं च महाकपिम्॥
पूजयित्वा यथान्यायं फलमूलैस्तपोधनः।
कुशलं परिपप्रच्छ रामं दशरथात्मजम्॥
कच्चित्ते कुशलं राम वानरैः सहितस्य वै।
कच्चिद्रावणमासाद्य न ते व्यसनमागतम्॥
ततः कथयतो राज्ञः सर्वं वृत्तमशेषतः।
यथा वधः कृतस्तेन रावणस्य दुरात्मनः॥
यथा सीता परित्राता यथा सेतुः समुद्रिणि।
सर्वं शुश्राव धर्मात्मा भरद्वाजो महामुनिः॥
🕉️ आशीर्वाद और विदाई (श्लोक ११-१५)
भरद्वाजो महातेजा इदं वचनमब्रवीत्॥
धन्योऽसि राम सुप्रीतो यत्त्वया दानवो हतः।
यशस्ते रोचते लोके सूर्यस्येव प्रभा सदा॥
अद्यप्रभृति वैदेही पतिव्रता सुखी भव।
पुनर्द्रक्ष्यसि सौमित्रिं भरतं च सलक्ष्मणम्॥
गच्छ त्वं निर्भयो राजन् स्वपुरं पुनरागतः।
अयोध्यायां महात्मानो वानरास्त्वां द्रक्ष्यन्ति च॥
इत्युक्त्वा भगवान् विप्रः प्रदक्षिणमथाकरोत्।
आशीर्भिर्योजयामास रामं सीतां च लक्ष्मणम्॥
🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं विशेष महत्त्व
👑 राम की विनम्रता
राम ने विजयी होने पर भी ऋषि के आश्रम में जाकर उनका आशीर्वाद लिया, जो उनकी विनम्रता और गुरुभक्ति का परिचायक है।
🌊 पुष्पक विमान का ऐतिहासिक महत्त्व
यह विमान कुबेर से रावण ने छीना था और अब राम इसका उपयोग कर रहे हैं। इसका उल्लेख भविष्य में राम के द्वारा कुबेर को लौटाने का भी है।
🧘 भरद्वाज ऋषि की तपोभूमि
प्रयाग का यह आश्रम धार्मिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है, जहाँ राम ने वनवास काल में भी भेंट की थी। यह स्थान त्रिवेणी संगम के निकट है।
🔜 अयोध्या प्रवेश की प्रस्तावना
यह सर्ग अयोध्या पहुँचने से पूर्व की अंतिम भेंट है, जो राम के राज्याभिषेक की ओर अग्रसर करता है।
🎯 शिक्षा : इस सर्ग से हमें सीख मिलती है कि सफलता के बाद भी हमें अपने गुरुजनों और बड़ों का सम्मान करना चाहिए। राम ने विजय के अहंकार में न आकर ऋषि का आशीर्वाद लिया, जो एक आदर्श है।