राम का पुष्पक विमान पर आरूढ़ होना
राम, सीता, लक्ष्मण, सुग्रीव, विभीषण और वानर सेना के साथ पुष्पक विमान पर आरोहण करते हैं। विमान कुबेर का है, परन्तु रावण द्वारा हरण किए जाने के बाद अब विभीषण के अधिकार में है। सभी लोग विमान में बैठकर अयोध्या लौटने की तैयारी करते हैं।
विवरण
रावण वध और देवताओं से वरदान प्राप्त करने के बाद राम अब अयोध्या लौटने की तैयारी करते हैं। विभीषण राम के पास आकर कहते हैं कि यह पुष्पक विमान कुबेर का है, जिसे रावण ने बलपूर्वक छीन लिया था। अब वह आपके अधिकार में है। आप इस पर आरूढ़ होकर अयोध्या जा सकते हैं। राम सीता, लक्ष्मण, सुग्रीव, विभीषण और मुख्य वानरों के साथ विमान पर चढ़ते हैं। विमान आकाश में ऊपर उठता है और सभी लोग लंका को नीचे देखते हैं। यह सर्ग पुष्पक विमान के वैभव और राम की वापसी की प्रसन्नता का वर्णन करता है।
(राम का पुष्पक विमान पर आरूढ़ होना)
🔆 प्रस्तावना : राम ने रावण का वध कर दिया, देवताओं से वरदान प्राप्त किये, और अब अयोध्या लौटने की तैयारी है। विभीषण उनके पास दिव्य पुष्पक विमान लेकर आते हैं। यह सर्ग राम की विजय यात्रा के शुभारम्भ का वर्णन करता है।
🚁 पुष्पक विमान का आगमन (श्लोक १-१०)
उवाच परमप्रीतः प्राञ्जलिः प्रणतो भृशम् ॥
इदं विमानं दिव्यं यत् पुष्पकं नाम नामतः ।
कुबेरस्य प्रियं भ्रातुर्वैश्रवणस्य धीमतः ॥
तेन दत्तं मया चैतद्रक्षितं रावणान्तिके ।
तदिदं राघवेन्द्र त्वं गृहाण सह सीतया ॥
प्रहर्षमतुलं लेभे सुग्रीवसहितस्तदा ॥
ततः प्रदक्षिणं कृत्वा विमानं पुष्पकं शुभम् ।
आरुरोह ततः श्रीमान् सीतया सह राघवः ॥
लक्ष्मणश्च सुग्रीवश्च विभीषणमुखास्तथा ।
वानराश्च महात्मानस्तमारुरुहुरञ्जसा ॥
✨ विमान का स्वरूप और आकाश में गमन (श्लोक ११-२०)
उत्पपात नभो गत्वा वानरैः समलंकृतम् ॥
हंसयुक्तं यथा मेघं वैदूर्यविमलैः शुभैः ।
व्यरोचत तदा राजन् रामस्याद्भुतदर्शनम् ॥
सर्वे ते वानरा हृष्टा रामं सुग्रीवमेव च ।
ददृशुः पुष्पकस्थास्ते लङ्कां रम्यामधो गताम् ॥
अपश्यन्त पुरीं लङ्कां समुद्रं च महोदधिम् ॥
रामस्तु सीतया सार्धं दर्शयन् सागरं तदा ।
उवाच मधुरं वाक्यं लक्ष्मणं परवीरहा ॥
पश्य लक्ष्मण लङ्कां तां रावणेन सुरक्षिताम् ।
मया विनिहतश्चैव रावणः ससुतः सचः ॥
🙌 विमान में प्रसन्नता और स्तुति (श्लोक २१-३०)
प्रसादात्तव रामाऽहं प्राप्तो राज्यं विभीषणः ॥
लङ्कां प्राप्तश्च धर्मेण वानराश्च सुखं स्थिताः ।
सीता च जनकात्मजा त्वया प्राप्ता यशस्विना ॥
एवं वदति सुग्रीवे वानराः सर्व एव तु ।
प्रणेमुः शिरसा रामं लक्ष्मणं च महाबलम् ॥
आशीर्भिर्वर्धयामासुर्देवर्षिपितृदानवाः ॥
गन्धर्वाप्सरसश्चैव ननृतुर्जगुश्च ह ।
पुष्पवृष्टिश्च महती पपात रघुनन्दने ॥
एवं विमानमारूढो रामः सीतापुरस्कृतः ।
शुशुभे सह सुग्रीवैः शचीव सह वासवः ॥
🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं विशेष महत्त्व
🌟 विजय यात्रा
यह सर्ग राम की विजय यात्रा का प्रारम्भ है। पुष्पक विमान पर आरोहण उनकी विजय और गौरव का प्रतीक है।
💎 पुष्पक विमान का महत्त्व
पुष्पक विमान केवल एक वाहन नहीं, अपितु दिव्य सम्पत्ति है, जो अब राम के अधिकार में आ गई। यह राम के परम वैभव को दर्शाता है।
🤝 कृतज्ञता
सुग्रीव द्वारा राम की प्रशंसा और सभी वानरों द्वारा प्रणाम करना उनकी कृतज्ञता और राम के प्रति अनन्य प्रेम को दर्शाता है।
🌺 सीता का स्थान
राम के साथ सीता का विमान पर होना उनके पुनर्मिलन की सार्थकता को दर्शाता है।
🎯 शिक्षा : यह सर्ग हमें सिखाता है कि सदा धर्म के मार्ग पर चलने से अंततः विजय और वैभव की प्राप्ति होती है। राम का विमान पर आरोहण उनके धर्म की विजय का प्रतीक है।