राम का सीता को स्वीकार करना
अग्निदेव और देवताओं के आशीर्वाद के पश्चात राम सीता को भावभीनी स्वीकार करते हैं और सबके समक्ष उनका सम्मान करते हैं। इसके बाद राम विभीषण को लंका का राज्य सौंपते हैं।
विवरण
देवताओं द्वारा सीता की पवित्रता प्रमाणित होने के बाद राम सीता को हार्दिक भाव से स्वीकार करते हैं। वे सीता से कहते हैं कि उन्हें कभी संदेह नहीं था, किन्तु लोकमर्यादा की रक्षा हेतु ऐसा करना पड़ा। सीता राम के चरणों में बैठ जाती हैं। तत्पश्चात् राम विभीषण को लंका का राज्य सौंपते हैं और सभी वानरों एवं राक्षसों का अभिनंदन करते हैं। यह सर्ग राम-सीता के मिलन और युद्धकाण्ड के समापन की ओर अग्रसर होने का सूचक है।
(राम का सीता को स्वीकार करना)
🔆 प्रस्तावना : देवताओं के आशीर्वाद और अग्निदेव के साक्ष्य से राम ने सीता को पुनः स्वीकार किया। उन्होंने सीता के समक्ष अपने हृदय का भाव प्रकट किया और फिर विभीषण को लंका का राज्य सौंपा।
💞 राम द्वारा सीता का स्वीकार (श्लोक १-१०)
न त्वां संदिहते बुद्धिर्मम देवि कदाचन ॥
लोकापवादभीतेन त्यक्ता त्वं जनकात्मजे ।
इदानीं तु प्रसन्नोऽस्मि देवतानां वचः श्रुत्वा ॥
रामं प्राञ्जलिरामन्त्र्य स्थिता तस्य पुरः सती ॥
👑 विभीषण को लंका-राज्य प्रदान (श्लोक ११-२०)
इदं राज्यं महाबाहो लङ्कायाः प्रतिपद्यताम् ॥
त्वमेव राजा लङ्कायाः सुग्रीवसहितोऽनघ ।
न हि मत्सकाशादन्यस्त्वत्तो धर्मपरो भुवि ॥
रामं प्रदक्षिणं कृत्वा जगाम सह राक्षसैः ॥
🙌 सभी का सम्मान (श्लोक २१-२९)
उवाच परमप्रीतो यूयं सर्वे कृतश्रमाः ॥
प्रीतोऽहं वानरश्रेष्ठाः सर्वेषां च विशेषतः ।
गृह्यतां वांजलिः कार्यं किं करोमि हितं वद ॥
न किंचिदिच्छामो राजन् द्रष्टुं त्वां सीतया सह ।
एतावदेव नः प्रीतं यत्त्वं दृष्टो महाबल ॥
🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं विशेष महत्त्व
💖 प्रेम और मर्यादा
राम का सीता के प्रति प्रेम अगाध है, फिर भी उन्होंने लोकमर्यादा का पालन किया। यह आदर्श राजा का लक्षण है।
🎁 कृतज्ञता
राम ने विभीषण को राज्य देकर और वानरों का सम्मान करके अपनी कृतज्ञता प्रकट की। यह राजनीति का सिद्धान्त है।
🎯 शिक्षा : कृतज्ञता और मर्यादा का पालन करने वाला व्यक्ति सदा सफल होता है। राम ने दोनों का पालन किया।