सीता का अग्नि में प्रवेश
राम के कठोर वचन सुनकर सीता अत्यन्त दुःखी होती हैं और लक्ष्मण से अग्नि प्रज्ज्वलित करने का आग्रह करती हैं। वह अग्नि की शपथ लेकर अपनी पवित्रता सिद्ध करने हेतु अग्नि में प्रवेश कर जाती हैं।
विवरण
राम के वचनों से आहत सीता अपनी पवित्रता सिद्ध करने के लिए अग्नि में प्रवेश करने का निर्णय लेती हैं। वह लक्ष्मण से अग्नि प्रज्ज्वलित करने का आग्रह करती हैं। लक्ष्मण राम की ओर देखते हैं, राम की मौन सहमति से वे अग्नि तैयार करते हैं। सीता अग्नि की परिक्रमा करके उसमें प्रवेश कर जाती हैं। समस्त देवता, राक्षस और वानर विस्मित होकर यह दृश्य देखते हैं। यह सर्ग सीता के पातिव्रत्य और आत्म-सम्मान का प्रतीक है।
(सीता का अग्नि में प्रवेश)
🔆 प्रस्तावना : राम के कठोर वचनों से सीता का हृदय विदीर्ण हो गया। उन्होंने अपनी पवित्रता प्रमाणित करने के लिए अग्नि का सहारा लिया। लक्ष्मण ने राम की आज्ञा से अग्नि प्रज्ज्वलित की, और सीता ने अग्नि में प्रवेश कर लिया।
🔥 अग्नि की याचना (श्लोक १-१०)
उवाच लक्ष्मणं दीना वाष्पसंदिग्धया गिरा ॥
चितां मे कुरु सौमित्रे सर्वलोकस्य सन्निधौ ।
शोकस्यास्य विनाशाय न ह्यन्यच्छरणं मम ॥
प्रेक्ष्य रामस्य भावं स चकाराग्निं समन्ततः ॥
🚺 सीता का अग्नि-प्रवेश (श्लोक ११-२०)
ब्राह्मणान् साधुवादांश्च सिषेवे परमेश्वरी ॥
अग्निं प्राञ्जलिरामन्त्र्य प्रविवेश हुताशनम् ।
अग्निं समभ्यनन्दंश्च दृष्ट्वा सीतां हुताशनम् ॥
😇 देवताओं की स्तुति (श्लोक २१-२८)
देवि त्वं रक्षिता नित्यं रामस्य महिषी प्रिया ॥
🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं विशेष महत्त्व
🔥 अग्नि – सत्य का प्रतीक
अग्नि साक्षी रखकर सीता अपनी पवित्रता सिद्ध करती हैं। यह सनातन धर्म में सत्य की कसौटी है।
🙏 सीता का आत्मसम्मान
सीता अपने सम्मान की रक्षा के लिए प्राणों की बाजी लगा देती हैं। यह उनके चरित्र की महानता दर्शाता है।
🎯 शिक्षा : सत्य और पवित्रता की रक्षा के लिए कठोर से कठोर परीक्षा भी स्वीकार करनी चाहिए। सीता का अग्नि-प्रवेश आत्मबलिदान की पराकाष्ठा है।