सीता की खोज
रावण के वध और विभीषण के राज्याभिषेक के पश्चात राम सीता की खोज में हनुमान को भेजते हैं। हनुमान अशोक वाटिका में जाकर सीता को ढूंढते हैं और उन्हें राम के सन्देश से अवगत कराते हैं।
विवरण
रावण की मृत्यु के बाद भी सीता का पता नहीं चल पाया था। राम चिंतित हैं और सीता के बारे में जानने को उत्सुक हैं। वे हनुमान को आदेश देते हैं कि वे जाकर सीता का पता लगाएं और उन्हें सब वृतांत बताएं। हनुमान तुरंत अशोक वाटिका जाते हैं, जहाँ सीता राक्षसियों के बीच निराश और दुःखी बैठी हैं। हनुमान सीता को राम के पराक्रम और रावण के वध की सूचना देते हैं तथा राम का सन्देश सुनाते हैं। सीता आश्वस्त होती हैं और हनुमान को धन्यवाद देती हैं। यह सर्ग सीता के मिलन की प्रस्तावना है।
📖 श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण – युद्धकाण्ड – सर्ग ७०
(सीता की खोज)
🔆 प्रस्तावना : रावण का वध हो चुका है, विभीषण का राज्याभिषेक हो गया है, किन्तु सीता का अभी पता नहीं। राम व्याकुल हैं। वे हनुमान को सीता की खोज में भेजते हैं।
🔍 राम का आदेश (श्लोक १-१०)
गच्छ शीघ्रं महाबाहो जानकी सन्निधिं प्रति ॥
मम वाक्याद् ब्रूहि देवीं रावणे निहते रणे ।
निर्भयां चैव तां कृत्वा क्षिप्रमानय मैथिलीम् ॥
🌿 अशोक वाटिका में सीता (श्लोक ११-२५)
विधूम इव पावार्चिं गतसत्त्वामिव स्थिताम् ॥
उपसृत्य महातेजाः प्राञ्जलिः प्रणतोऽभवत् ।
न्यवेदयत चात्मानं राघवस्य च सन्निधौ ॥
🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं शिक्षा
📘 गूढ़ार्थ : राम का सीता के प्रति अगाध प्रेम और कर्तव्यपालन इस सर्ग में दिखता है। हनुमान की सेवा-निष्ठा और सीता का धैर्य भी अद्वितीय है।
💡 शिक्षा : कठिन से कठिन परिस्थिति में धैर्य न छोड़ें। सच्चे सेवक की निष्ठा और प्रभु की कृपा से ही संकट का अंत होता है।