विभीषण का राज्याभिषेक
रावण के वध और अंत्येष्टि के पश्चात राम विभीषण को लंका के राजा के रूप में राज्याभिषेक करने का आदेश देते हैं। सुग्रीव आदि सभी वानरगण उपस्थित रहते हैं और विधिवत विभीषण का राजतिलक किया जाता है।
विवरण
रावण की मृत्यु के बाद राम ने विभीषण को लंका के राज्य का उत्तराधिकारी घोषित किया। उन्होंने सुग्रीव और अन्य वानरों की सहायता से विभीषण का राज्याभिषेक करने की व्यवस्था की। विभीषण ने राम का आभार व्यक्त किया और उनकी सेवा में तत्पर रहने का वचन दिया। यह सर्ग न्यायपूर्ण शासन की स्थापना और राम के धर्मपालन का प्रतीक है।
📖 श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण – युद्धकाण्ड – सर्ग ६९
(विभीषण का राज्याभिषेक)
🔆 प्रस्तावना : रावण के अंत और अंत्येष्टि के बाद, राम अपने धर्म के अनुसार लंका के उचित शासन की व्यवस्था करते हैं। वे विभीषण को, जिन्होंने राम का साथ दिया, लंका का राजा नियुक्त करते हैं।
👑 विभीषण को राज्य का अधिकार (श्लोक १-१०)
लङ्कायाः पालनं सम्यग् विभीषणे नियुज्यताम् ॥
अयं हि राक्षसश्रेष्ठो धर्मज्ञः सत्यवाक् शुचिः ।
मयि चाव्यभिचारेण भक्तो राज्यमिहार्हति ॥
🎉 राज्याभिषेक समारोह (श्लोक ११-२२)
विभीषणं महाप्राज्ञं राघवः समयोजयत् ॥
तिलकं कारयामास स्वर्णेन च महात्मना ।
मन्त्रैश्च राज्यसिद्ध्यर्थं ब्राह्मणैः समुदाहृतैः ॥
🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं शिक्षा
📘 गूढ़ार्थ : राम का यह कार्य यह सिद्ध करता है कि वे केवल विजेता ही नहीं, बल्कि एक आदर्श शासक भी हैं। वे योग्य व्यक्ति को राज्य सौंपकर व्यवस्था सुनिश्चित करते हैं।
💡 शिक्षा : योग्य और धर्मपरायण व्यक्ति को ही शासन का दायित्व सौंपना चाहिए। मित्रता और निष्ठा का उचित सम्मान होना चाहिए।