युद्ध काण्ड अध्याय 69

विभीषण का राज्याभिषेक

रावण के वध और अंत्येष्टि के पश्चात राम विभीषण को लंका के राजा के रूप में राज्याभिषेक करने का आदेश देते हैं। सुग्रीव आदि सभी वानरगण उपस्थित रहते हैं और विधिवत विभीषण का राजतिलक किया जाता है।

विवरण

रावण की मृत्यु के बाद राम ने विभीषण को लंका के राज्य का उत्तराधिकारी घोषित किया। उन्होंने सुग्रीव और अन्य वानरों की सहायता से विभीषण का राज्याभिषेक करने की व्यवस्था की। विभीषण ने राम का आभार व्यक्त किया और उनकी सेवा में तत्पर रहने का वचन दिया। यह सर्ग न्यायपूर्ण शासन की स्थापना और राम के धर्मपालन का प्रतीक है।

📖 श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण – युद्धकाण्ड – सर्ग ६९

(विभीषण का राज्याभिषेक)

ॐ श्री परमात्मने नमः ॥ अथ एकोनसप्ततितमः सर्गः ॥

🔆 प्रस्तावना : रावण के अंत और अंत्येष्टि के बाद, राम अपने धर्म के अनुसार लंका के उचित शासन की व्यवस्था करते हैं। वे विभीषण को, जिन्होंने राम का साथ दिया, लंका का राजा नियुक्त करते हैं।

👑 विभीषण को राज्य का अधिकार (श्लोक १-१०)

॥ श्लोक १-५ ॥
ततः रामो महातेजाः सुग्रीवं प्रति भाषत ।
लङ्कायाः पालनं सम्यग् विभीषणे नियुज्यताम् ॥
अयं हि राक्षसश्रेष्ठो धर्मज्ञः सत्यवाक् शुचिः ।
मयि चाव्यभिचारेण भक्तो राज्यमिहार्हति ॥
📖 भावार्थ : तब महातेजस्वी राम ने सुग्रीव से कहा: "लंका के पालन का भार विभीषण को सौंपा जाए। यह राक्षसश्रेष्ठ धर्मज्ञ, सत्यवादी और पवित्र है। मुझमें अव्यभिचारिणी भक्ति रखता है, अतः यह राज्य का अधिकारी है।"
॥ श्लोक ६-१० ॥
📖 भावार्थ : राम ने आदेश दिया कि विभीषण का तुरंत राज्याभिषेक किया जाए। सभी वानर और राक्षस इस प्रस्ताव पर सहमत हुए।

🎉 राज्याभिषेक समारोह (श्लोक ११-२२)

॥ श्लोक ११-१५ ॥
📖 भावार्थ : सुग्रीव ने तुरंत राज्याभिषेक की तैयारी प्रारम्भ की। वानरों ने स्वर्ण कलश, चंदन, पुष्प आदि एकत्र किए। हनुमान, अंगद, जाम्बवान आदि उपस्थित थे।
॥ श्लोक १६-२२ ॥
ततः सुग्रीवसहितैः वानरैः सर्वतो वृतम् ।
विभीषणं महाप्राज्ञं राघवः समयोजयत् ॥
तिलकं कारयामास स्वर्णेन च महात्मना ।
मन्त्रैश्च राज्यसिद्ध्यर्थं ब्राह्मणैः समुदाहृतैः ॥
📖 भावार्थ : तब राघव (राम) ने सुग्रीव सहित समस्त वानरों से घिरे महाप्राज्ञ विभीषण का राज्याभिषेक किया। उन्होंने सुवर्ण के द्वारा तिलक किया तथा राज्य की सिद्धि के लिए ब्राह्मणों द्वारा उच्चारित मंत्रों से अभिषेक करवाया।
॥ श्लोक २३-३० ॥
📖 भावार्थ : विभीषण ने राम का आभार व्यक्त किया और प्रतिज्ञा की कि वे सदा धर्म से शासन करेंगे तथा राम के आदेशों का पालन करेंगे। राम ने उन्हें आशीर्वाद दिया और लंका की सुख-समृद्धि की कामना की।

🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं शिक्षा

📘 गूढ़ार्थ : राम का यह कार्य यह सिद्ध करता है कि वे केवल विजेता ही नहीं, बल्कि एक आदर्श शासक भी हैं। वे योग्य व्यक्ति को राज्य सौंपकर व्यवस्था सुनिश्चित करते हैं।

💡 शिक्षा : योग्य और धर्मपरायण व्यक्ति को ही शासन का दायित्व सौंपना चाहिए। मित्रता और निष्ठा का उचित सम्मान होना चाहिए।

ॐ तत्सत् – इति वाल्मीकीय रामायणे युद्धकाण्डे एकोनसप्ततितमः सर्गः ॥
॥ श्रीराम जय राम जय जय राम ॥
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