राम द्वारा रावण के सिर काटना और पुनः जुड़ना
राम रावण के सिर को बाण से काट देते हैं, लेकिन अमृत-भरे सिर के कटने पर भी तुरंत नया सिर उत्पन्न हो जाता है।
विवरण
राम रावण के सिर पर घोर प्रहार करते हैं और उसे काट डालते हैं, किन्तु रावण के पास अमृत-कुण्ड होने के कारण उसका सिर पुनः जुड़ जाता है या नया सिर बन जाता है। राम बार-बार सिर काटते हैं, किन्तु हर बार नया सिर प्रकट हो जाता है। यह देख राम चिन्तित हो जाते हैं।
(राम द्वारा रावण के सिर काटना और पुनः जुड़ना)
🔆 प्रस्तावना : राम ने रावण का सिर काट दिया, किन्तु आश्चर्य! तुरंत दूसरा सिर प्रकट हो जाता है। यह क्रम बार-बार चलता है। यह सर्ग रावण के अमृत-कुण्ड के रहस्य और राम की जिज्ञासा का वर्णन करता है।
🌀 सिर काटने का अद्भुत क्रम (श्लोक १-२०)
चिच्छेद परमक्रुद्धः सर्वलोकभयङ्करः ॥
तच्छिरः सहसा कृत्तं पपात धरणीतले ।
अथान्यच्छिर आभाति रावणस्य महात्मनः ॥
न चास्य क्षीयते वीर्यं न चायुः क्षीयते तथा ॥
अमृतं हि रहः प्राप्तं रावणेन महात्मना ।
ब्रह्मणो वरदानेन तेन जीवति राक्षसः ॥
🧠 मातलि का उपदेश (श्लोक २१-३०)
नैवं शक्यो रणे हन्तुं रावणोऽमृतसंनिभः ॥
तस्य हृदि स्थितं वीर अमृतं ब्रह्मतेजसा ।
तस्मादस्य वधोपायं चिन्तयस्व महामते ॥
ब्रह्मास्त्रेणैव संहार्यो रावणो नात्र संशयः ।
🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ
यह सर्ग यह संकेत देता है कि केवल शारीरिक बल से रावण को नहीं मारा जा सकता, उसके अमृत रूपी संजीवनी का रहस्य समझना आवश्यक है। अंत में मातलि के द्वारा ब्रह्मास्त्र के प्रयोग का संकेत मिलता है, जो अगले सर्ग की भूमिका तैयार करता है।