राम-लक्ष्मण की वापसी
राम, लक्ष्मण और हनुमान पाताल से वापस लौटते हैं। वानर सेना उन्हें देखकर अत्यंत हर्षित होती है।
विवरण
अहिरावण के वध के बाद हनुमान राम और लक्ष्मण को मुक्त कराते हैं। तीनों पाताल से वापस लौटते हैं। जब वे वानर सेना के बीच पहुँचते हैं, तो सभी वानर अत्यंत हर्षित होते हैं। सुग्रीव, अंगद, जाम्बवान आदि सभी राम-लक्ष्मण को देखकर आनंदित होते हैं। विभीषण भी प्रसन्न होते हैं। राम हनुमान की प्रशंसा करते हैं और सभी मिलकर आगामी युद्ध की तैयारी करते हैं।
(राम-लक्ष्मण की वापसी)
🔆 प्रस्तावना : अहिरावण का वध करके हनुमान राम-लक्ष्मण को लेकर पाताल से वापस लौटे। उनकी सकुशल वापसी से वानर सेना में हर्ष और उल्लास छा गया। यह सर्ग उस आनंद के क्षण का वर्णन करता है।
🎊 वापसी और हर्ष (श्लोक १-१०)
पातालाद्विनिष्क्रम्य ददृशे वानरान् बहून् ॥
तं दृष्ट्वा वानराः सर्वे हर्षनादान् प्रचक्रिरे ।
रामलक्ष्मणमासाद्य मुदिताः सुखिनोऽभवन् ॥
प्रहर्षमतुलं लेभे विभीषणसमन्वितः ॥
🙏 राम का आशीर्वाद (श्लोक ११-२०)
उवाच लक्ष्मणं वीरं हनूमन्तं च मारुतिम् ॥
भवद्भिर्निहतः शत्रुः पाताले राक्षसाधिपः ।
कृतकार्याः स्म सुग्रीव युद्धायाभिमुखा वयम् ॥
युद्धाय कृतसंकल्पा रावणं प्रति राक्षसम् ॥
⚔️ युद्ध की तैयारी (श्लोक २१-३२)
युद्धायाभिमुखान् चक्रे रावणस्य वधाय वै ॥
रामलक्ष्मणयोः प्राप्तिर्वानराणां च हर्षणम् ॥
🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं विशेष महत्त्व
🙌 हर्ष और उल्लास
राम-लक्ष्मण की वापसी से वानर सेना में जो हर्ष छा गया, वह उनके प्रति अगाध श्रद्धा और प्रेम का प्रतीक है।
🛡️ युद्ध की तैयारी
अब अंतिम युद्ध के लिए सब तैयार हैं, जो राम की विजय सुनिश्चित करेगा।
🎯 शिक्षा : नेतृत्व का संकट में भी धैर्य बनाए रखना और सेना का मनोबल बढ़ाना आवश्यक है।