अहिरावण द्वारा राम-लक्ष्मण का हरण
अहिरावण माया का प्रयोग करके राम और लक्ष्मण को सुला देता है और उनका हरण करके पाताल ले जाता है। वानर सेना में हाहाकार मच जाता है।
विवरण
अहिरावण ने अपनी माया से राम और लक्ष्मण को योगनिद्रा में सुला दिया। फिर उसने दोनों भाइयों को उठाकर पाताललोक ले गया। प्रातःकाल जब वानरों ने राम-लक्ष्मण को नहीं देखा, तो उनमें हाहाकार मच गया। विभीषण ने बताया कि यह अहिरावण का काम है, जो पाताल का राजा है और रावण का मित्र है। सभी वानर चिंतित हो गए। हनुमान ने राम-लक्ष्मण को खोजने का निश्चय किया।
📖 श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण – युद्धकाण्ड – सर्ग ५५
(अहिरावण द्वारा राम-लक्ष्मण का हरण)
🔆 प्रस्तावना : अहिरावण ने अपनी माया से राम-लक्ष्मण को सुलाकर उनका हरण कर लिया और पाताल ले गया। इस घटना से वानर सेना में शोक और हाहाकार मच गया। यह सर्ग उस दुःखद घटना का वर्णन करता है।
😴 योगनिद्रा का प्रयोग (श्लोक १-८)
प्रविवेश महाबाहुः सेनयोरुभयोरपि ॥
योगनिद्रां तदा चक्रे रामलक्ष्मणयोर्बली ।
सुप्तौ तौ पुरुषव्याघ्रौ कृत्वा तूर्णमुपानयत् ॥
राक्षसैः बहुभिः सार्धं रामलक्ष्मणवानरौ ॥
😢 वानरों में हाहाकार (श्लोक ९-२०)
रामं लक्ष्मणमुख्यांश्च सुग्रीवो विह्वलोऽभवत् ॥
हाहाकारो महानासीत् वानराणां विशां पते ।
क्व नु रामः क्व लक्ष्मणः क्व वा गताविति ब्रुवन् ॥
उवाच वानरान् सर्वान् अहिरावणचेष्टितम् ॥
अनेन राक्षसेन्द्रेण पातालाधिपतिना बली ।
रामलक्ष्मणावुद्धृतौ नात्र कार्या विचारणा ॥
🦍 हनुमान का निश्चय (श्लोक २१-३६)
प्रत्युवाच महातेजाः सुग्रीवं वानराधिपम् ॥
अहं गच्छामि पातालं रामलक्ष्मणकारणात् ।
आनेष्यामि च तौ वीरौ हत्वा तं राक्षसाधिपम् ॥
गच्छ वीर महाबाहो शीघ्रं कार्यं समापय ॥
हनूमान् अथ तेजस्वी विभीषणसमन्वितः ।
पातालं प्रययौ वीरो रामलक्ष्मणकारणात् ॥
इत्येष पञ्चपञ्चाशः सर्गो युद्धकाण्डतः ।
अहिरावणचेष्टितं रामलक्ष्मणहरणम् ॥
🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं विशेष महत्त्व
🌀 माया का प्रभाव
अहिरावण की माया से राम-लक्ष्मण भी सो गए, जो दर्शाता है कि माया का प्रभाव बड़े से बड़े योद्धा पर भी हो सकता है।
🦍 हनुमान की भक्ति
हनुमान ने तुरंत राम-लक्ष्मण को खोजने का निश्चय किया, जो उनकी अनन्य भक्ति को दर्शाता है।
🎯 शिक्षा : विपत्ति में धैर्य नहीं खोना चाहिए और तुरंत समाधान ढूँढना चाहिए।