रावण का अहिरावण से मिलना
रावण अपने मित्र अहिरावण, जो पाताल का राजा है, से मिलता है और उससे सहायता माँगता है। अहिरावण रावण को सहायता का आश्वासन देता है।
विवरण
रावण के अनेक सेनापति और पुत्र मारे जा चुके थे। वह अत्यंत निराश और क्रोधित था। तब उसका मित्र अहिरावण, जो पाताललोक का राजा था, उससे मिलने आया। अहिरावण अत्यंत पराक्रमी और मायावी था। रावण ने उसे अपनी दयनीय स्थिति बताई और राम-लक्ष्मण को मारने में सहायता माँगी। अहिरावण ने रावण को सहायता का आश्वासन दिया और एक योजना बनाई। उसने राम-लक्ष्मण का हरण करने का निश्चय किया।
📖 श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण – युद्धकाण्ड – सर्ग ५४
(रावण का अहिरावण से मिलना)
🔆 प्रस्तावना : रावण के अनेक वीर योद्धा मारे जा चुके थे। तब उसका मित्र अहिरावण, पाताल का राजा, उससे मिलने आया। यह सर्ग उनकी मुलाकात और अहिरावण द्वारा सहायता के वचन का वर्णन करता है।
🤝 रावण की निराशा (श्लोक १-८)
सेनापतिषु मुख्येषु राक्षसेषु च सर्वशः ॥
चिन्तयामास मेधावी किं करोमि क्व गच्छामि ॥
पातालाधिपतिर्वीरो रावणं प्रति संगतः ॥
स मित्रं सम्परिष्वज्य रावणं वाक्यमब्रवीत् ।
किमर्थं दुःखितो राजन् ब्रूहि मे त्वं सखा ह्यहम् ॥
🗣️ सहायता का वचन (श्लोक ९-१८)
मम पुत्रा हता युद्धे सेनापतय एव च ॥
रामो दाशरथिः शत्रुः सुग्रीवसहितो बली ।
तं हन्तुं नोपजानामि त्वं मित्रं साह्यमाचर ॥
मा भैः सखे न भेतव्यं मम साहाय्यमस्ति ते ॥
अहं हनिष्ये तौ वीरौ रामलक्ष्मणवानरौ ।
आनयिष्ये तवाग्रे तु बद्ध्वा तौ पुरुषर्षभौ ॥
🔮 योजना (श्लोक १९-३२)
प्रविश्य सेनयोर्मध्ये योगनिद्रां प्रयोजयत् ॥
रामलक्ष्मणौ सुप्तौ तु गृहीत्वा तौ महाबलः ।
पातालं प्रययौ वीरो हर्षेण महता वृतः ॥
अहिरावणसंगमो रावणस्य च निश्चयः ॥
🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं विशेष महत्त्व
🤝 मित्रता का महत्व
रावण ने अपने मित्र अहिरावण से सहायता माँगी, जो विपत्ति में मित्र के महत्व को दर्शाता है।
🌀 अहिरावण की माया
अहिरावण ने माया का प्रयोग करके राम-लक्ष्मण का हरण किया, जो उसकी शक्ति को दर्शाता है।
🎯 शिक्षा : सच्चा मित्र विपत्ति में काम आता है, किन्तु मित्रता का उपयोग अधर्म के लिए नहीं करना चाहिए।