मकराक्ष का वध
मकराक्ष और वानर सेना के बीच घोर युद्ध होता है। अंततः राम मकराक्ष का वध कर देते हैं।
विवरण
मकराक्ष विशाल सेना के साथ युद्धभूमि में पहुँचता है। वह अत्यंत क्रोधित है और सीधे राम पर आक्रमण करता है। राम और मकराक्ष के बीच भीषण युद्ध होता है। मकराक्ष अनेक अस्त्र-शास्त्रों का प्रयोग करता है, किन्तु राम उन सबको विफल कर देते हैं। अंततः राम अपने बाणों से मकराक्ष के रथ को नष्ट कर देते हैं और उसके सिर को धड़ से अलग कर देते हैं। मकराक्ष के मरते ही राक्षस सेना पुनः भाग खड़ी होती है और वानरों में उत्साह छा जाता है।
📖 श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण – युद्धकाण्ड – सर्ग ५३
(मकराक्ष का वध)
🔆 प्रस्तावना : मकराक्ष ने राम पर आक्रमण किया, किन्तु राम ने उसे युद्ध में परास्त कर दिया। यह सर्ग राम के अद्वितीय पराक्रम और मकराक्ष के वध का वर्णन करता है।
⚔️ युद्ध का आरंभ (श्लोक १-१०)
चिक्षेप बहुभिर्बाणैः सर्वगात्रेषु भीषणैः ॥
रामस्तु भृशसंक्रुद्धो लक्ष्मणेन समन्वितः ।
दिशो विदिश आकाशं बाणैरापूरयद् बली ॥
मायामास्थाय घोरां तु युद्ध्यमानो न दृश्यते ॥
🌀 माया का नाश (श्लोक ११-२२)
विभीषणमुवाचेदं केनोपायेन हन्यते ॥
विभीषणस्तु तच्छ्रुत्वा रामं प्रत्यभाषत ।
माया नश्यति रामस्य सत्येन नात्र संशयः ॥
ब्रह्मास्त्रं प्रसमाधाय मुमोचैनदरिंदमः ॥
तेनास्त्रेण हता माया मकराक्षो निपातितः ॥
🎉 विजय का उत्सव (श्लोक २३-३८)
राक्षसाः प्राद्रवन् भीता वानराश्च विजहृषुः ॥
रामं पूजयामासुः सुग्रीवप्रमुखास्तदा ॥
मकराक्षवधो यत्र रामस्य च पराक्रमः ॥
🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं विशेष महत्त्व
🕉️ सत्य की शक्ति
विभीषण ने बताया कि सत्य से माया नष्ट होती है, और राम ने सत्य का पालन करते हुए विजय प्राप्त की।
🏹 राम का पराक्रम
राम ने एक बार फिर अपने अद्वितीय युद्ध कौशल का परिचय दिया।
🎯 शिक्षा : सत्य और धर्म के आगे माया और अधर्म टिक नहीं सकते।